निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास को पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन देर रात उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उसी रात उन्हें नोटिस देकर रिहा कर दिया। हालांकि रिहाई से पहले पाटलिपुत्र थाने में उनके खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया जा चुका था।
मुख्यमंत्री के बेटे पर आरोपों से बढ़ा विवाद
अमिताभ दास ने हाल ही में मुख्यमंत्री के बेटे पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया।इससे पहले चित्रगुप्त नगर थाने में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था, जो NEET छात्रा से दुष्कर्म और हत्या मामले से जुड़ा बताया जा रहा है।पुलिस के अनुसार उन्होंने इस प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठे आरोपों वाला वीडियो साझा किया था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
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मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उनके अपार्टमेंट पर छापेमारी की।इस कार्रवाई में मोबाइल फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कई दस्तावेज जब्त किए गए। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
राजकीय प्रतीक के कथित दुरुपयोग का आरोप
पूर्व आईपीएस अधिकारी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद भी अपने निजी लेटर पैड पर भारत सरकार के राजकीय प्रतीक चिन्ह और IPS पदनाम का इस्तेमाल किया।कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा करना ‘भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005’ के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है।
पटना पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी में इस पहलू को भी शामिल किया है और मामले की जांच जारी है।













