Saturday, August 15, 2026
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Flight Ticket Hike : यात्री ध्यान दें, भारतीय एयरलाइंस पर 105 अरब का आर्थिक ग्रहण, ICRA की चेतावनी : डॉलर-ईंधन के झटके से हवाई टिकटों की कीमतों में बड़ा उछाल तय…

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Flight Ticket Hike : नई दिल्ली: अगर आप हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तैयार हो जाइए, क्योंकि आपके टिकट जल्द ही महंगे हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारतीय एयरलाइंस का संयुक्त शुद्ध घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचकर 95 से 105 अरब रुपये (लगभग $1.26 अरब) तक जा सकता है—जो पिछले साल के अनुमान से लगभग दोगुना है।

Flight Ticket Hike : इस ‘घाटे के बम’ का सीधा असर एयरलाइंस के परिचालन दबाव पर पड़ेगा, जिसका बोझ अंततः हवाई यात्रियों की जेब पर टिकटों की बढ़ती कीमतों के रूप में पड़ने की आशंका है।

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ईंधन और डॉलर की दोहरी मार

ICRA ने घाटे के पीछे दो मुख्य खलनायकों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. महंगा विमान ईंधन (ATF): एयरलाइंस के कुल खर्च का 30-40% हिस्सा ईंधन पर जाता है। अक्टूबर 2025 में ही ATF की कीमतों में 3.3% की बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक अस्थिरता के कारण ईंधन की लागत अनिश्चित बनी हुई है।
  2. मजबूत अमेरिकी डॉलर: भारतीय एयरलाइंस की एक बड़ी मजबूरी यह है कि विमानों का किराया (लीज), रखरखाव और कल-पुर्जे जैसे बड़े खर्च डॉलर में होते हैं। रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती, एयरलाइंस के मुनाफे को लगातार निगल रही है।

घरेलू यात्रियों का ‘मोहभंग’ और ग्राउंडेड विमान

वित्तीय चुनौतियों के बीच, घरेलू यात्रियों की संख्या में भी एक अजीब ‘सावधान यात्रा मनोदशा’ दिखाई दे रही है। सितंबर 2025 में घरेलू यात्रियों की संख्या (128.5 लाख) पिछले साल के मुकाबले 1.4% कम रही। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अंतर्राष्ट्रीय रूट पर यात्रियों की संख्या में 7.8% की मजबूत वृद्धि देखी गई है, जो कुछ हद तक राहत प्रदान कर रही है।

इसके अलावा, लगभग 133 विमान (कुल बेड़े का 15-17%) Pratt & Whitney इंजन की खराबी और सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण ‘ग्राउंडेड’ खड़े हैं। जब विमान उड़ान नहीं भरते, तो वे कमाई नहीं करते, लेकिन उनका लीज रेंट और अन्य खर्च जारी रहता है, जो घाटे को और गहरा कर रहा है।

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भविष्य की उड़ान

इन सब चुनौतियों के बावजूद, ICRA ने भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए अपने ‘स्थिर’ दृष्टिकोण को बनाए रखा है, लेकिन विकास अनुमान को 7-10% से घटाकर 4-6% कर दिया है। मजबूत मूल कंपनियों वाली एयरलाइंस, अच्छी यात्री संख्या (Load Factors) और टिकटों से मिल रही ठीक-ठाक कमाई के सहारे इस तूफान को झेलने का प्रयास कर रही हैं।

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