Wednesday, August 26, 2026
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Paddy Procurement Centre : महासमुंद में किसानों की मेहनत को मिल रहा उचित मूल्य, 86 हजार टन से अधिक धान की खरीदी

Paddy Procurement Centre : महासमुंद खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत राज्य सरकार की मंशानुरूप महासमुंद जिले में धान खरीदी का कार्य सुचारू और पारदर्शी तरीके से जारी है। जिले के 182 धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों की उपज को उचित मूल्य पर खरीदा जा रहा है। आज शाम तक जिले में कुल 86,307 टन धान की खरीदी होने का अनुमान है, जबकि धान खरीदी के लिए अभी 40 दिन शेष हैं।

जिले के उपार्जन केंद्रों पर खरीदी में तेजी देखी जा रही है। बेलसोंडा धान उपार्जन केंद्र की व्यवस्थाएँ सुचारू खरीदी का अच्छा उदाहरण बनी हैं। यहाँ अब तक 9,330.80 क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है, जिसमें 2,346.80 क्विंटल मोटा धान और 6,984 क्विंटल सरना (पतला) धान शामिल है।

Paddy Procurement Centre :
‘टोकन तुंहर एप’ से किसानों को मिला समान अवसर

बेलसोंडा केंद्र प्रभारी ने बताया कि अधिकांश किसान अब ऑनलाइन टोकन प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं और निर्धारित समय पर धान लेकर केंद्र पहुँच रहे हैं, जिससे खरीदी प्रक्रिया तेज़, सरल और भीड़मुक्त बनी हुई है।

किसान भूपेंद्र कुमार पटेल (नांदगांव) ने 7 एकड़ खेत से उपजाया 80 क्विंटल धान आसानी से बेचा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली से उन्हें केंद्र पर इंतजार नहीं करना पड़ा और पूरी प्रक्रिया सहज रही।

नांदगांव की सतीश सोनी ने भी 5 एकड़ खेत से उपजाए गए 28 क्विंटल धान को बिना किसी परेशानी के निर्धारित समय पर विक्रय किया।

घोड़ारी गाँव के लघु कृषक पवन कुमार चक्रधारी ने 2 एकड़ कृषि भूमि पर उपजाए गए 44.40 क्विंटल धान को केंद्र में आसानी से बेचा। उन्होंने समय पर टोकन कटवाकर लाभ उठाया और सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना की।

किसानों भूपेंद्र, पवन और सतीश ने सामूहिक रूप से कहा कि टोकन तुंहर एप से सभी किसानों को समान अवसर मिल रहा है।

Paddy Procurement Centre :
72 घंटे में भुगतान, पारदर्शिता का आधार
केंद्र प्रभारी ने बताया कि खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता और कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया के साथ किया जा रहा है। किसानों को 72 घंटे के भीतर भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में जमा किया जा रहा है। केंद्र में बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, और तौल, नमी की जांच से लेकर भुगतान तक की प्रणाली पूरी तरह डिजिटाइज्ड है। बेहतर व्यवस्थाओं के चलते किसानों का विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है।

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