[nishaanebaz.com] MP Nursing College Scam: भोपाल। मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेज घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की परीक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। मामले में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के करीब 130 नर्सिंग कॉलेज सीबीआई जांच के दायरे में हैं। जांच के बाद जिन कॉलेजों को ‘ग्रीन चेक’ मिलेगा, वहां के विद्यार्थी अपनी परीक्षा दे सकेंगे। वहीं, जिन कॉलेजों को ग्रीन चेक नहीं मिलेगा, वहां पढ़ने वाले छात्रों को अन्य योग्य संस्थानों में शिफ्ट किया जाएगा।इस प्रक्रिया से करीब 8 से 10 हजार नर्सिंग छात्रों के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका है। अब विद्यार्थियों की नजर सीबीआई जांच और कॉलेजों की स्थिति पर टिकी हुई है।
ग्रीन चेक वाले कॉलेजों में ही परीक्षा की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई जांच के दौरान निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले कॉलेजों को ग्रीन चेक मिलने के बाद वहां के छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति होगी।वहीं, जिन संस्थानों को जांच में ग्रीन चेक नहीं मिलेगा, उनके विद्यार्थियों को दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि कॉलेज की स्थिति के कारण छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित न हो।
ग्वालियर-चंबल के 130 कॉलेज जांच में
नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े मामले में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के करीब 130 संस्थानों को सीबीआई जांच में शामिल किया गया है। जांच के दौरान कॉलेजों में उपलब्ध सुविधाओं, नियमों के पालन और निर्धारित मानकों की स्थिति की पड़ताल की जाएगी।जांच के आधार पर कॉलेजों की श्रेणी तय होगी और इसी के अनुसार विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर आगे की व्यवस्था की जाएगी।
कॉलेज प्रबंधन से फीस-डोनेशन का हिसाब मांगने की बात
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि विद्यार्थियों ने फीस, डोनेशन या अन्य किसी मद में कॉलेज प्रबंधन को राशि दी है, तो उन्हें संबंधित जिम्मेदार लोगों से सवाल करना चाहिए।छात्रों को जरूरत पड़ने पर प्रबंधन के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करने और सख्त कार्रवाई की मांग करने की बात भी कही गई।
31 अगस्त तक हाईकोर्ट जा सकते हैं छात्र
छात्रों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वर्ष 2021-22 में दाखिले के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर समिति बनाई गई थी। जांच के दौरान कुछ कॉलेजों को नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया था।छात्र पक्ष ने संकेत दिया कि मामले को लेकर 31 अगस्त से पहले हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है। ऐसे में प्रभावित विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है।
सीबीआई जांच के बिना राहत मुश्किल
जबलपुर हाईकोर्ट की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि सीबीआई जांच के बिना नर्सिंग कॉलेजों को राहत मिलना मुश्किल होगा। कॉलेजों की स्थिति जांच के आधार पर तय की जाएगी और उसी के अनुसार छात्रों की परीक्षा व्यवस्था निर्धारित होगी।इससे उन कॉलेजों की चिंता बढ़ गई है, जिनकी स्थिति अभी जांच के बाद स्पष्ट होनी है।
छात्रों को परीक्षा और भविष्य की चिंता
MP Nursing College Scam: नर्सिंग कॉलेज विवाद में सबसे बड़ी चिंता उन विद्यार्थियों की है, जिन्होंने कई वर्षों की पढ़ाई और फीस के बाद अब परीक्षा के लिए तैयारी की है। कॉलेजों की जांच और मान्यता की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है।अब सीबीआई जांच में कॉलेजों को मिलने वाले ‘ग्रीन चेक’ से यह तय होगा कि विद्यार्थी अपने मौजूदा संस्थान में परीक्षा दे पाएंगे या उन्हें दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित किया जाएगा।फिलहाल हजारों नर्सिंग छात्रों की नजर जांच प्रक्रिया और अदालत के अगले फैसलों पर है। आने वाले दिनों में कॉलेजों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद विद्यार्थियों की परीक्षा और आगे की पढ़ाई को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।





