छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा खेल! बिना भर्ती के युवक को मिली सरकारी नौकरी

Rahul Goshwami

CG Fake Appointment: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के नाम से एक युवक को नौकरी का पत्र दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिस पद पर युवक की नियुक्ति बताई गई, उसके लिए निगम ने कोई भर्ती प्रक्रिया ही नहीं निकाली थी।मामला तब सामने आया, जब युवक उसी दस्तावेज के आधार पर नौकरी ज्वाइन करने कसडोल पहुंच गया। वहां अधिकारियों ने जब कागजात की जांच की तो फर्जी नियुक्ति पत्र होने का शक हुआ। जांच के बाद निगम की ओर से पुलिस को जानकारी दी गई और पूरे मामले की पड़ताल शुरू हुई।

पुलिस के मुताबिक, कसडोल के हांडापारा निवासी हेमंत साहू के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किया गया था। इस दस्तावेज में उसे डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किए जाने की बात लिखी गई थी।पत्र में बताया गया था कि हेमंत की पदस्थापना 6 जुलाई 2026 से कसडोल कार्यालय में होगी। इसी जानकारी के आधार पर वह नौकरी शुरू करने के लिए संबंधित जगह पहुंचा था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद दस्तावेज की सच्चाई सामने आने लगी।

जांच में सामने आईं कई बड़ी गड़बड़ियां
निगम के अधिकारियों ने जब फर्जी नियुक्ति पत्र की जांच की तो उसमें कई ऐसी बातें मिलीं, जो सामान्य सरकारी पत्र में होनी चाहिए थीं, लेकिन यहां मौजूद नहीं थीं। पुलिस के अनुसार, दस्तावेज पर कोई पत्र क्रमांक नहीं था। इसके साथ ही उस पर तारीख भी दर्ज नहीं थी।मामला यहीं नहीं रुका। जांच में यह भी पता चला कि राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम का कसडोल में कोई कार्यालय ही नहीं है। ऐसे में कसडोल कार्यालय में नियुक्ति और पदस्थापना का दावा अपने आप में बड़ा सवाल बन गया।
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अक्टूबर 2024 के बाद नहीं निकली ऐसी भर्ती
पुलिस के अनुसार, निगम ने अक्टूबर 2024 के बाद डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर भर्ती के लिए कोई आवेदन नहीं बुलाया था। साथ ही इस पद के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की भी जानकारी नहीं मिली।यानी जिस समय का फर्जी नियुक्ति पत्र सामने आया, उस समय संबंधित पद के लिए कोई नई भर्ती प्रक्रिया चल ही नहीं रही थी। इसी वजह से पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह दस्तावेज किसने और किस उद्देश्य से तैयार किया।

डिजिटल साइन की नकल का भी आरोप
इस मामले में डिजिटल हस्ताक्षर के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, नियुक्ति पत्र पर निगम के महाप्रबंधक विनोद वर्मा के डिजिटल साइन को स्कैन करके इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।यदि जांच में यह बात सही साबित होती है तो फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने के लिए सरकारी अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर की नकल किए जाने का मामला भी सामने आएगा। पुलिस अब दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति तक पहुंचने के लिए तकनीकी और दूसरे स्तर पर जानकारी जुटा रही है।

क्या दूसरे युवाओं को भी भेजे गए ऐसे पत्र?
अब जांच का एक बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल हेमंत साहू तक सीमित है या फिर अन्य लोगों को भी इसी तरह के फर्जी नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि ऐसे कितने दस्तावेज तैयार किए गए। इसके साथ ही नौकरी दिलाने के नाम पर किसी व्यक्ति से पैसे लिए गए या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।अगर ऐसे और मामले सामने आते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। पुलिस संभावित पीड़ितों और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी जुटाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

AI और डिजिटल तकनीक से बढ़ी नई चुनौती
आज डिजिटल टूल और AI की मदद से किसी सरकारी दस्तावेज की हूबहू नकल तैयार करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। ऐसे में फर्जी नियुक्ति पत्र जैसे मामलों में दस्तावेज की केवल शक्ल देखकर उस पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी सरकारी विभाग के नाम पर कथित फर्जी नियुक्ति आदेश जारी होने का मामला सामने आ चुका है। ऐसे मामलों में अधिकारियों के डिजिटल साइन के गलत इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।

नौकरी के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
सरकारी नौकरी से जुड़ा कोई भी नियुक्ति पत्र मिलने पर उम्मीदवार को सबसे पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और कार्यालय से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। भर्ती के लिए आवेदन किया ही नहीं है तो किसी भी नियुक्ति पत्र को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर नौकरी के नाम पर पैसे देना भी नुकसान पहुंचा सकता है। फर्जी नियुक्ति पत्र के मामले में आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन, आवेदन संख्या, पत्र क्रमांक और संबंधित विभाग से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। जांच के बाद ही साफ होगा कि फर्जी नियुक्ति पत्र किसने तैयार किया, डिजिटल साइन का इस्तेमाल कैसे हुआ और क्या इस पूरे मामले में एक से ज्यादा लोग शामिल हैं।

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