Eco-Tourism Boost in Raipur: धरसींवा की गधीया आर्द्रभूमि बनी पक्षियों का आशियाना; चूजों के साथ विचरण करते नजर आए ‘कॉमन कूट’ और ‘लेजर व्हिसलिंग डक’

VIKASH KHALKHO

Eco-Tourism Boost in Raipur: – रिपोर्ट: मोहम्मद याकुब, धरसींवा, रायपुर। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के दृष्टिकोण से रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड से एक बेहद सुखद और मनमोहक खबर सामने आई है। क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोढ़ी की ‘गधीया आर्द्रभूमि’ (Gadhiya Wetland) इन दिनों स्थानीय और विदेशी प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रही है। हाल ही में यहाँ पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफर्स को एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां दुर्लभ ‘कॉमन कूट’ (Common Coot – वैज्ञानिक नाम: Fulica atra) अपने नन्हे चूजों के साथ जल की सतह पर सुरक्षित विचरण करती हुई दिखाई दी।

इस खूबसूरत और विहंगम दृश्य को पक्षी प्रेमियों ने बिना देर किए अपने कैमरों में कैद कर लिया। कॉमन कूट के अलावा यहाँ ‘स्पॉट बिल्ड डक’ (Spot-billed Duck) और ‘लेजर व्हिसलिंग डक’ (Lesser Whistling Duck) की अठखेलियां भी उनके शावकों के साथ देखी जा रही हैं, जिसने पर्यावरणविदों को काफी उत्साहित किया है।

अनुकूल पारिस्थितिकी और सुरक्षित प्रजनन स्थल का प्रमाण

विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि किसी भी आर्द्रभूमि में विदेशी या संवेदनशील पक्षियों का अपने चूजों के साथ दिखाई देना इस बात का पुख्ता संकेत है कि वह क्षेत्र उनके लिए पूरी तरह अनुकूल और सुरक्षित है। गधीया आर्द्रभूमि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है।

पक्षियों के सफल प्रजनन के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जा रहे हैं:

  1. प्राकृतिक वनस्पति की प्रचुरता: जलीय पौधों और प्राकृतिक वनस्पतियों के कारण पक्षियों को छिपने और घोंसले बनाने की पर्याप्त जगह मिल रही है।

  2. शांत व प्रदूषण मुक्त वातावरण: मानवीय हस्तक्षेप कम होने और प्रदूषण मुक्त शांत परिवेश के कारण पक्षी बिना किसी भय के रह रहे हैं।

  3. भोजन की पर्याप्त उपलब्धता: आर्द्रभूमि में छोटे जलीय जीव, कीड़े-मकोड़े और आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो बच्चों के पालन-पोषण के लिए जरूरी हैं।

संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन का प्रेरणादायक संदेश

गधीया आर्द्रभूमि में पक्षियों के इस नए संसार को देखकर स्थानीय ग्रामीणों में भी कौतूहल और खुशी का माहौल है। प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के जीवंत दृश्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये स्थानीय समुदाय को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का एक बेहतरीन माध्यम हैं।

आर्द्रभूमियों (Wetlands) को ‘धरती का स्पंज’ भी कहा जाता है, जो न केवल पक्षियों और जीवों को आश्रय देती हैं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को संतुलित रखने में अमूल्य भूमिका निभाती हैं। गोढ़ी गांव की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को सहेजने और भविष्य में पर्यटन के मानचित्र पर उभारने की मांग अब पर्यावरण प्रेमी करने लगे हैं।

Share The News
Share This Article
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *