Dr. Ramanuragi Maharaj : कथा के 15 लाख रुपए को लेकर विवाद: कथावाचक ने विधानसभा के बाहर आत्मदाह की दी चेतावनी, मंत्री ने आरोपों को बताया झूठा

Sanjay Sahu
Dr. Ramanuragi Maharaj

Dr. Ramanuragi Maharaj : रायपुर : रायपुर में एक कथावाचक द्वारा मंत्री पर पैसे नहीं देने का आरोप लगाते हुए आत्मदाह की चेतावनी देने का मामला सामने आया है। कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि अगर उन्हें उनका भुगतान नहीं मिला तो वे विधानसभा के बाहर आत्मदाह कर सकते हैं। उनका आरोप है कि मंत्री राजेश अग्रवाल ने उनसे श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करवाया, लेकिन करीब 15 लाख रुपए का भुगतान अब तक नहीं किया गया।

Dr. Ramanuragi Maharaj : कांग्रेस नेता धनंजय ठाकुर ने कथावाचक का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार की आलोचना की है। वहीं मंत्री राजेश अग्रवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।

Dr. Ramanuragi Maharaj : मामले के अनुसार, कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज का कहना है कि 2 जनवरी से 9 जनवरी 2026 तक अंबिकापुर के लखनपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ था। उनके अनुसार यह आयोजन मंत्री राजेश अग्रवाल से जुड़ा था और कथा संपन्न होने के बाद भी उन्हें उनकी मेहनताना राशि नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे पैसे मांगने जाते हैं तो उन्हें टाल दिया जाता है।

Dr. Ramanuragi Maharaj : दूसरी ओर मंत्री राजेश अग्रवाल का कहना है कि डॉ. रामानुरागी महाराज ने स्वयं आयोजन करने के लिए संस्कृति विभाग में आवेदन दिया था। उन्होंने केवल उस आवेदन पर सामान्य प्रक्रिया के तहत टिप्पणी की थी, जैसा अन्य आवेदनों पर किया जाता है। मंत्री के मुताबिक संस्कृति विभाग में इस तरह के आयोजन के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती, इसलिए आवेदन खारिज कर दिया गया। उनका कहना है कि आवेदन रिजेक्ट होने के बाद कथावाचक उनसे पैसे मांग रहे हैं, जबकि आयोजन उन्होंने नहीं करवाया था।

Dr. Ramanuragi Maharaj : मंत्री ने यह भी बताया कि दो दिन पहले विधानसभा के बाहर उनकी मुलाकात डॉ. रामानुरागी महाराज से हुई थी, लेकिन वे उस समय जल्दबाजी में विधानसभा जा रहे थे, इसलिए ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई। इसके बाद ही यह वीडियो वायरल हो गया।

Dr. Ramanuragi Maharaj : इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता धनंजय ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर सरकार दूसरे राज्यों के कथावाचकों को विशेष सम्मान के साथ बुलाती है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय कथावाचकों को उनका मेहनताना तक नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।

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