Donald Trump Iran Threat : तेहरान/दुबई। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ और सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बाद ईरान ने कड़े तेवर अपनाए हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कालिबाफ ने रविवार को दोटूक चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान की धरती पर हमला किया, तो अमेरिकी सेना और इस्राइल उनके लिए ‘वैध निशाना’ होंगे।
ईरानी संसद में रविवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब कई कट्टरपंथी सांसद मंच पर चढ़ गए और ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। कालिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है और संभावित निशानों की सूची में इस्राइल को शीर्ष पर रखा गया है। यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान आजादी के करीब है और अमेरिका वहां की मौजूदा सरकार को हटाने में मदद के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, अमेरिकी हमले की आहट से इस्राइल में हड़कंप मच गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइली सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार को इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच लंबी फोन वार्ता हुई, जिसमें ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की गई। ट्रंप द्वारा सैन्य विकल्पों की जानकारी मांगे जाने के बाद इस्राइल किसी भी जवाबी ईरानी हमले से निपटने की तैयारी कर रहा है।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच डोनाल्ड ट्रंप के एक और कथित निर्देश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ग्रीनलैंड पर संभावित आक्रमण के लिए ‘आकस्मिक योजना’ तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इस योजना की वैधता और राजनीतिक व्यवहार्यता पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने आग में घी का काम किया है। निर्वासित ईरानी राजकुमार रेजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी इस पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की आग में झोंक सकती है।













