Diwali 2025 : नई दिल्ली। इस बार धनतेरस पर सोने और चांदी की रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद भारतीय ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की, जिसने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया। देशभर में अनुमानित ₹60,000 करोड़ का सोना और चांदी बिका, जो पिछले साल के मुकाबले 25% से अधिक का ऐतिहासिक उछाल है।
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Diwali 2025 :हैरान करने वाली वजह: निवेश के लिए खरीदारी
Diwali 2025 : विशेषज्ञों का कहना है कि बिक्री में इस रिकॉर्ड उछाल के पीछे मुख्य वजह धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ग्राहकों का रणनीतिक निवेश (Strategic Investment) का इरादा रहा।
- ज्वैलरी नहीं, सिक्कों की मांग: इस बार ग्राहकों ने ज्वैलरी (आभूषण) के बजाय सोने और चांदी के सिक्कों को प्राथमिकता दी।
- मुनाफे की उम्मीद: लोगों को यह स्पष्ट संकेत मिला कि सोने की कीमतों में उछाल जारी रहेगा (सोने की कीमतों में 65% और चांदी में 81% की तेजी के बावजूद)। ग्राहक अब खरीदारी को निवेश के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
- मेकिंग चार्ज से बचाव: ज्वैलरी पर लगने वाले मोटे मेकिंग चार्ज से बचने के लिए भी ग्राहकों ने सिक्कों की तरफ रुख किया। मुंबई के जवेरी बाजार से लेकर देश के कई हिस्सों में सिक्कों की खरीदारी के लिए लंबी कतारें देखी गईं।
24-कैरेट सिक्कों की रही भारी डिमांड:
बाजार में सबसे ज्यादा मांग 24-कैरेट के 10 ग्राम सोने के सिक्कों की रही, जिनकी कीमत लगभग ₹1.40 लाख प्रति सिक्का थी। वहीं, ज्वैलरी के मामले में 22 और 18 कैरेट के हल्के डिज़ाइन्स तथा युवा ग्राहकों ने कम दाम वाले 9 और 14 कैरेट के विकल्प पसंद किए।
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व्यापार संगठन ‘कैट’ के मुताबिक, कीमतों में भारी बढ़ोतरी (सोने की कीमत ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के पार) के बावजूद, ग्राहकों का धैर्य टूट गया क्योंकि उन्हें यकीन हो गया था कि कीमतें अब नीचे नहीं आएंगी। धनतेरस 2025 के दिन भारतीय ग्राहकों ने कुल करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए।











