Bharani Shradh 2026: पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन लोग अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस साल भरणी श्राद्ध 29 सितंबर को है या 30 सितंबर को, इसे लेकर लोगों में असमंजस है। पंचांग के अनुसार, भरणी श्राद्ध की सही तिथि, मुहूर्त और इसका महत्व जानिए।
भरणी श्राद्ध 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, भरणी नक्षत्र 29 सितंबर 2026 को सुबह 9:03 बजे शुरू होगा और 30 सितंबर 2026 को सुबह 7:36 बजे तक रहेगा। उदया तिथि और शास्त्र सम्मत नियमों के आधार पर भरणी श्राद्ध 29 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।
भरणी श्राद्ध 2026 का कुतुप मुहूर्त
श्राद्ध और पितृ तर्पण के लिए कुतुप मुहूर्त को विशेष शुभ माना जाता है। 29 सितंबर 2026 को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। इस दौरान पितरों का स्मरण कर तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है।
भरणी श्राद्ध का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। भरणी श्राद्ध को भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में गयाजी में पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो लोग गया जाकर श्राद्ध नहीं कर पाते, वे भरणी श्राद्ध के दिन विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध कर्म कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
भरणी श्राद्ध के दिन क्या करें?
• पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
• विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान करें।
• पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।
• श्राद्ध पक्ष की धार्मिक परंपराओं का पालन करें।
• इस दौरान बड़े मांगलिक और उत्सव संबंधी आयोजनों से बचने की परंपरा है।
पितृ पक्ष 2026 कब तक रहेगा?
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हुई है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या का दिन उन पूर्वजों के श्राद्ध के लिए विशेष होता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती।






