दतिया : मध्य प्रदेश के दतिया जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिन सरकारी स्कूलों को बच्चों के भविष्य की नींव माना जाता है, उनकी दीवारें अब निजी कोचिंग संस्थानों, प्राइवेट स्कूलों और स्थानीय कारोबारियों के विज्ञापनों से पटी नजर आ रही हैं। यह नजारा न सिर्फ शिक्षा के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करता है।
स्कूल की दीवारें बनीं प्रचार का माध्यम
जिले के कई शासकीय स्कूलों में बिना किसी अनुमति के दीवारों को होर्डिंग की तरह इस्तेमाल किया गया। जहां कभी प्रेरक विचार और शैक्षणिक संदेश लिखे जाने चाहिए थे, वहां अब ट्यूशन, स्कूल एडमिशन और व्यावसायिक प्रचार सामग्री दिखाई दे रही है।
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जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब लंबे समय से होता रहा, लेकिन शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सब जानकारी में था या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।
बच्चों के मनोविज्ञान पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल परिसर का वातावरण बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित करता है। शैक्षणिक भवनों पर व्यावसायिक प्रचार बच्चों को गलत संदेश देता है और शिक्षा की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति विज्ञापन लिखवाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और स्कूल परिसरों को विज्ञापन मुक्त किया जाएगा।
कार्रवाई होगी या सिर्फ आश्वासन?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई ज़मीन पर दिखाई देगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। शिक्षा को लेकर प्रशासन की गंभीरता की परीक्षा अब शुरू हो चुकी है।











