Ramnarayan Baghel Murder : पालक्कड़ (केरल)/रायपुर : रोजगार की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर केरल पहुंचे छत्तीसगढ़ के एक दलित प्रवासी मजदूर के साथ मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। केरल के पालक्कड़ जिले में चोरी के झूठे शक और ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ समझने की गलतफहमी में भीड़ ने 31 वर्षीय रामनारायण बघेल की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव का रहने वाला रामनारायण अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था, जो गरीबी से जूझ रहे अपने दो बच्चों और बीमार मां का पेट पालने के लिए 13 दिसंबर को ही केरल पहुंचा था।
क्या ही समाज बना दिया है! केरल में काम की तलाश में गए मजदूर रामनारायण बघेल की भीड़ ने बांग्लादेशी और चोरी की शक में पीट पीटकर हत्या कर दी! पांच आरोपी पकड़े गए हैं … pic.twitter.com/2LvNbSeYrG
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) December 21, 2025
Ramnarayan Baghel Murder : यह वीभत्स घटना 17 दिसंबर को वालायर थाना क्षेत्र के अट्टापल्लम गांव में हुई। बताया जा रहा है कि रामनारायण रास्ता भटक गया था और संभवतः भूख से व्याकुल था। बुधवार दोपहर वह मनरेगा में काम कर रही कुछ महिलाओं के पास पहुंचा और उनके खाने के बैग में हाथ डाला। महिलाओं के शोर मचाने पर वहां पुरुषों की भारी भीड़ जुट गई। भीड़ ने रामनारायण को घेर लिया और उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए पूछताछ शुरू कर दी। घटना के वायरल वीडियो में हमलावरों को उसे “बांग्लादेशी” बताते हुए धमकाते सुना जा सकता है। सूनसान इलाके में ले जाकर भीड़ ने शाम तक उसे लाठी-डंडों से जानवरों की तरह पीटा।
Ramnarayan Baghel Murder : शाम को जब पुलिस मौके पर पहुंची और रामनारायण को अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाले खुलासे हुए हैं। मृतक के शरीर पर 80 से अधिक चोटों के निशान मिले हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर का कोई भी हिस्सा चोट से बचा नहीं था। सिर की गंभीर चोट और आंतरिक रक्तस्राव उसकी मौत का मुख्य कारण बना। पुलिस ने इस मामले में पांच स्थानीय लोगों—अनु, प्रसाद, मुरली, आनंदन और बिपिन को गिरफ्तार किया है, जिनमें से कुछ का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है।
Ramnarayan Baghel Murder : केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पालक्कड़ पुलिस प्रमुख से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। स्थानीय मजदूर संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘मॉब लिंचिंग’ करार दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे और शव को सरकारी खर्च पर छत्तीसगढ़ भेजने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा की बाधा और स्थानीय समाज से दूरी के कारण प्रवासी मजदूर अक्सर अफवाहों और नफरत का आसान शिकार बन जाते हैं।
Ramnarayan Baghel Murder : सक्ती जिले के करही गांव में इस खबर के बाद से मातम पसरा है। मृतक की पत्नी ललिता और अन्य परिजन शव लेने के लिए केरल पहुंच चुके हैं। यह घटना साल 2018 के चर्चित ‘मधु हत्याकांड’ की याद दिलाती है, जब पालक्कड़ में ही एक आदिवासी युवक को भीड़ ने इसी तरह मौत के घाट उतार दिया था। फिलहाल, पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और वीडियो फुटेज के जरिए अन्य हमलावरों की पहचान की जा रही है।











