Sunday, September 27, 2026
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Christmas market : जर्मनी में रद्द होते क्रिसमस मार्केट और शरीयत की मांग; तुलसी गबार्ड ने अमेरिका को दी गंभीर चेतावनी

Christmas market : वॉशिंगटन: अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित कंजर्वेटिव राजनीतिक सम्मेलन ‘AMFest’ में पूर्व सांसद तुलसी गबार्ड ने वैश्विक सुरक्षा और कट्टरपंथी विचारधाराओं को लेकर बेहद तीखा हमला बोला है। गबार्ड ने चेतावनी दी कि इस्लामवाद (Islamism) केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि एक जटिल राजनीतिक विचारधारा है, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक आजादी के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे क्रिसमस का त्योहार नजदीक आ रहा है, जर्मनी में सुरक्षा खतरों और इस्लामी कट्टरपंथ के डर से क्रिसमस मार्केट रद्द किए जा रहे हैं, जो एक गंभीर संकेत है।

Christmas market : तुलसी गबार्ड ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि इस्लामवादी विचारधारा मूल रूप से अमेरिका के उन लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ असंगत है, जिन पर इस देश की नींव रखी गई है। उन्होंने चार्ली किर्क के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका में स्वतंत्रता का स्रोत कोई सरकार या सत्ता नहीं, बल्कि ईश्वर है। गबार्ड के अनुसार, इस्लामवाद इस मूल विश्वास को ही नकारता है कि प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर द्वारा स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। उनके मुताबिक, यह विचारधारा कानूनों या हिंसा के जरिए लोगों पर अपनी संकुचित सोच थोपने का काम करती है।

Christmas market : गबार्ड ने जोर देकर कहा कि यह खतरा अब केवल भविष्य की आशंका नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिका की सीमाओं के भीतर एक वास्तविकता बन चुका है। उन्होंने ह्यूस्टन जैसी जगहों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अमेरिकी कानूनी और राजनीतिक व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कर शरीयत कानून लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने न्यू जर्सी के पैटरसन शहर का भी उदाहरण दिया, जिसे अब ‘पहला मुस्लिम शहर’ कहने पर गर्व किया जाता है, और वहां स्थानीय स्तर पर इस्लामी सिद्धांतों को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करने की कोशिशें हो रही हैं।

Christmas market : ऑस्ट्रेलिया में हुए हालिया आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए गबार्ड ने पहले भी कहा था कि इस्लामिज़्म पूरी दुनिया की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की स्थिति को “बड़े पैमाने पर हुई घुसपैठ” का परिणाम बताया। AMFest में उन्होंने दोहराया कि जब तक इस विचारधारा की प्रकृति को गहराई से नहीं समझा जाएगा, तब तक इसके द्वारा पैदा होने वाले विभिन्न खतरों से निपटना संभव नहीं होगा।

Christmas market : फिलहाल, तुलसी गबार्ड के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक उग्रवाद और सुरक्षा नीतियों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उनके इस संबोधन को विशेष रूप से यूरोप और अमेरिका में बढ़ते सुरक्षा संकटों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहाँ सार्वजनिक आयोजनों और धार्मिक त्योहारों के दौरान सतर्कता बढ़ा दी गई है।

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