निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत और घने जंगलों के लिए देशभर में जाना जाता है। इन जंगलों में हाथियों समेत कई दुर्लभ वन्य प्राणी निवास करते हैं। इन्हीं वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य में देश का पहला वाइल्डलाइफ रेल कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।
खरसिया-धरमजयगढ़-उरगा-कुसमुंडा-गेवरारोड-पेंड्रा रोड रेल लाइन घने जंगलों से होकर गुजरती है, जहां अक्सर रेल पटरी पार करते समय वन्य प्राणी हादसों का शिकार हो जाते थे। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई है।
35 संरचनाएं करेंगी वन्यजीवों की सुरक्षा
इस वाइल्डलाइफ रेल कॉरिडोर के तहत पूरे रूट पर 21 अंडरपास और 14 ओवरब्रिज यानी कुल 35 संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनका उद्देश्य वन्य प्राणियों को रेल लाइन पार करने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में 3 ओवरब्रिज और अंडरपास बनकर तैयार हो चुके हैं और इन्हें वन्यजीवों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। वन विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में कोई भी वन्य प्राणी घायल नहीं हुआ है, जो परियोजना की सफलता का संकेत है।
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2500 करोड़ की लागत, केंद्र सरकार की पहल
करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह कॉरिडोर केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय परियोजना है। यह कॉरिडोर खरसिया, धरमजयगढ़, कोरबा, कटघोरा और मरवाही वन मंडलों से होकर गुजरेगा।
खरसिया से धरमजयगढ़ के 124 किलोमीटर हिस्से में 3 अंडरपास और 3 ओवरब्रिज तैयार हो चुके हैं। वहीं धरमजयगढ़ से उरगा और आगे गेवरारोड से पेंड्रा रोड तक विभिन्न चरणों में निर्माण कार्य जारी है।
हाथियों और अन्य वन्यजीवों को मिलेगा सुरक्षित मार्ग
छत्तीसगढ़ में हाथियों की संख्या अधिक है और उनका मूवमेंट लगातार बना रहता है। रेल लाइन पार करते समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है। इससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।











