रायपुर। Nishaanebaz.com-KTU Media Research Milestone: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) के जनसंचार शोध केंद्र में उच्च स्तरीय अकादमिक अनुसंधान को नई गति मिली है। विश्वविद्यालय के चार होनहार शोधार्थियों ने शोध सलाहकार समिति (RAC) के समक्ष अपने पीएचडी (Ph.D.) शोधकार्यों का सफलता पूर्वक अंतिम प्रस्तुतीकरण (Presentation) किया। विषय विशेषज्ञों एवं समिति के विद्वान सदस्यों ने प्रस्तुत किए गए शोधकार्यों की विषयगत गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उनके सामाजिक महत्त्व की मुक्त कंठ से सराहना की।
कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने दी शुभकामनाएं, प्री-सबमिशन के बाद हुए संशोधन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने सभी चार शोधार्थियों को उनके उत्कृष्ट शोध प्रदर्शन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मीडिया और जनसंचार जैसे गतिशील क्षेत्र में इस तरह के मौलिक शोधकार्यों से अकादमिक अनुसंधान की नई संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा और यह समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
उल्लेखनीय है कि शोधार्थियों के शोधकार्यों का प्री-सबमिशन जुलाई माह में संपन्न हुआ था, जिसके बाद समिति द्वारा प्राप्त सुझावों के आधार पर शोध में आवश्यक संशोधन व परिमार्जन किए गए।
इन 4 नए व प्रासंगिक विषयों पर प्रस्तुत हुए शोधकार्य
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विनोद सावंत: “भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयामों का समीक्षात्मक अध्ययन” — इसमें भारतीय राजमार्गों पर चलने वाले ट्रकों पर उकेरी गई कला, लिखे संदेशों (Truck Art & Slogans) के माध्यम से होने वाले दृश्य-संचार, उसके सामाजिक प्रभाव और विविध सांस्कृतिक आयामों का गहन विश्लेषण किया गया है।
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दीक्षा देशपांडे: “बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु से उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन” — इस अध्ययन में स्मार्टफोन और डिजिटल स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों के मनोवैज्ञानिक व व्यावहारिक जीवन में आ रहे बदलावों का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
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विकास कुमार: “जनजातीय समुदायों में लोकसंचार परंपराओं का अध्ययन (छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के विशेष संदर्भ में)” — इस शोध में छत्तीसगढ़ की समृद्ध उरांव जनजाति की लोकसंचार पद्धतियों, उनकी लोक कलाओं, विशेषताओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर प्रकाश डाला गया है।
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सैयद अमीर मुस्तफ़ा हाशमी: “ए कम्पेरेटिव स्टडी ऑन बेटरमेंट ऑफ सोसायटी थ्रू कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कम्युनिकेशन इन छत्तीसगढ़ एंड झारखंड” — इस अध्ययन में छत्तीसगढ़ और झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) संचार के माध्यम से सामाजिक विकास और जन-कल्याण में योगदान का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
विशेषज्ञों ने सराहा, प्रदेश में अनुसंधान को मिलेंगे नए आयाम शोध सलाहकार समिति (RAC) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती ने इस अवसर पर कहा कि जनसंचार शोध केंद्र निरंतर नए और प्रासंगिक विषयों पर शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रस्तुतीकरण के दौरान विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष मंडावी तथा पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी प्रस्तुत शोधकार्यों की महत्ता को रेखांकित करते हुए शोधार्थियों को उनके सफल शैक्षणिक योगदान के लिए बधाई दी।
