Sunday, September 27, 2026
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Chhattisgarh Medicinal Plants: जड़ी-बूटी की खेती से कमाई का मौका, छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलेगी लाखों की अग्रिम राशि

Chhattisgarh Medicinal Plants
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Chhattisgarh Medicinal Plants: रायपुर। छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में नारायणपुर और धमतरी जिले के किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की जा रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों को खेती के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उन्हें औषधीय फसलों की व्यावसायिक खेती से जोड़ना है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: तीन मॉडल के जरिए हो रही औषधीय खेती

Chhattisgarh Medicinal Plants: औषधीय पौधों की खेती की योजना मुख्य रूप से तीन मॉडल के तहत संचालित की जा रही है। इनमें क्लस्टर मॉडल, व्यक्तिगत किसान मॉडल और स्व-सहायता समूह मॉडल शामिल हैं।

Chhattisgarh Medicinal Plants: क्लस्टर मॉडल में कई किसान एक साथ मिलकर औषधीय फसलों की खेती करते हैं। इससे बड़े स्तर पर उत्पादन करने के साथ फसल की खरीदी और परिवहन में भी सुविधा होती है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: धमतरी जिले के 25 गांवों में करीब 45 स्व-सहायता समूह लगभग 115 एकड़ जमीन पर ब्राह्मी, वच, खस, लेमनग्रास और शतावर जैसी औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं।

Chhattisgarh Medicinal Plants: किसानों को मिलेंगे पौधे और प्रशिक्षण

Chhattisgarh Medicinal Plants: औषधीय खेती से जुड़ने वाले किसानों को राज्य औषधीय पादप बोर्ड की ओर से विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों को निःशुल्क पौधे देने के साथ खेती की तकनीक और बेहतर उत्पादन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अलावा किसानों को अध्ययन भ्रमण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: फसल की बिक्री के लिए भी व्यवस्था

औषधीय फसलों की बिक्री को आसान बनाने के लिए संबंधित संस्थाओं के साथ अनुबंध किए जा रहे हैं। इससे किसानों को उत्पाद की बिक्री के लिए बाजार तलाशने में परेशानी कम होगी और खरीदी की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जा सकेगी।

कैसे उठा सकते हैं योजना का लाभ?

इस योजना से जुड़ने के इच्छुक किसान व्यक्तिगत रूप से, क्लस्टर बनाकर या स्व-सहायता समूह के माध्यम से राज्य औषधीय पादप बोर्ड से संपर्क कर सकते हैं। योजना के तहत पात्र किसानों को निःशुल्क पौधे, तकनीकी प्रशिक्षण और अग्रिम प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाती है।

कौन-कौन से औषधीय पौधे उगा रहे किसान?

ब्राह्मी: ब्राह्मी का उपयोग आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। इसे विशेष रूप से मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आयुर्वेदिक तैयारियों में इस्तेमाल किया जाता है।

वच: वच का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है। इसकी जड़ों का औषधीय महत्व है और बाजार में इसकी मांग रहती है।

खस: खस की सुगंधित जड़ों और उससे प्राप्त तेल का उपयोग इत्र, कॉस्मेटिक और अन्य उत्पादों में किया जाता है। इसके व्यावसायिक उपयोग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए आय का एक विकल्प बन सकती है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: लेमनग्रास: लेमनग्रास से प्राप्त सुगंधित तेल का इस्तेमाल साबुन, कॉस्मेटिक और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। इसकी खेती को अपेक्षाकृत कम लागत वाली व्यावसायिक फसल के रूप में देखा जाता है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: शतावर: शतावर का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों में किया जाता है। इसकी जड़ों की औषधीय उपयोगिता के कारण बाजार में इसकी मांग रहती है।

Chhattisgarh Medicinal Plants: सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने पर

Chhattisgarh Medicinal Plants: औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देकर सरकार किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ आय के नए विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। अग्रिम प्रोत्साहन राशि, निःशुल्क पौधे, प्रशिक्षण और खरीदी की व्यवस्था के जरिए किसानों को औषधीय खेती से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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