CG News: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप का सामना कर रहे एक व्याख्याता के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। शासकीय हाई स्कूल अछोला में पदस्थ व्याख्याता जीवन प्रसाद देवांगन को निलंबित कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ के संचालक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
व्याख्याता पर कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ करने और विद्यालय परिसर में शराब का सेवन करने की शिकायत की गई थी। मामले की प्रारंभिक जांच में शिकायत की पुष्टि होने के बाद विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की। आरोपी के खिलाफ पहले ही संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा चुका है।
छात्रा से छेड़छाड़ की शिकायत के बाद जांच
यह मामला महासमुंद जिले के शासकीय हाई स्कूल अछोला से जुड़ा है। व्याख्याता जीवन प्रसाद देवांगन के खिलाफ नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा स्कूल परिसर में शराब सेवन करने की शिकायत भी सामने आई थी।
शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की गई। जांच में शिकायत की पुष्टि होने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई। हालांकि, आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
BNS और POCSO एक्ट के तहत दर्ज है मामला
व्याख्याता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75(1) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 8 एवं 10 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं महिला की गरिमा से जुड़े अपराधों और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित प्रावधानों के तहत आती हैं।पुलिस ने आरोपी को 10 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया। मामला दर्ज होने और गिरफ्तारी के बाद अब शिक्षा विभाग ने भी उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की है।
48 घंटे से अधिक न्यायिक अभिरक्षा में रहने पर निलंबन
जारी आदेश के मुताबिक, आरोपी व्याख्याता के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के कारण निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय आदेश में निलंबन को 10 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना गया है।इस कार्रवाई के बाद व्याख्याता के खिलाफ आपराधिक मामले के साथ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। मामले में आगे की स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
मामले पर आगे की कार्रवाई पर नजर
नाबालिग छात्रा से जुड़े इस मामले में आरोपी के खिलाफ दर्ज अपराध और विभागीय कार्रवाई दोनों महत्वपूर्ण हैं। निलंबन प्रशासनिक कदम है, जबकि आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। मामले की आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनी रहेगी।