CG News: महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में राजस्व विभाग के कामकाज में लापरवाही और कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की समीक्षा के बाद जिले के पांच पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। इन मामलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण में लापरवाही, खेतों का भौतिक सत्यापन नहीं करना और जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) ने विभागीय प्रक्रिया के बाद निलंबन के आदेश जारी किए हैं। एक साथ पांच पटवारियों पर हुई इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हलचल मच गई है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व रिकॉर्ड के संधारण में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती की जाएगी। खासकर डिजिटल फसल सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना जानकारी दर्ज करना प्रशासन के लिए गंभीर विषय है।
कहीं डिजिटल फसल सर्वे में लापरवाही, तो कहीं जमीन के रिकॉर्ड पर सवाल
जिले में जिन पांच पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनके मामले अलग-अलग हैं। बसना तहसील के पटवारी उदय प्रकाश राजपूत को डिजिटल फसल सर्वेक्षण में लापरवाही के चलते निलंबित किया गया है। डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से खेतों और फसलों से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। ऐसे में सर्वे के दौरान लापरवाही होने से सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
वहीं, सरायपाली के पटवारी जितेंद्र सिंह बाघ के खिलाफ शासकीय जमीन को दूसरे कृषक के नाम दर्ज करने का आरोप है। सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की अनियमितता को प्रशासन गंभीरता से लेता है, क्योंकि ऐसे मामलों का संबंध भूमि के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों की शुद्धता से होता है।
इसी तरह महासमुंद के पटवारी हरीश चंद्राकर के खिलाफ खसरे की वास्तविक स्थिति छिपाकर दोबारा नामांतरण करने के मामले में कार्रवाई की गई है। खसरा भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेख होता है। इसमें दर्ज जानकारी के आधार पर जमीन से जुड़े कई प्रशासनिक और कानूनी कार्य किए जाते हैं। ऐसे में रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति छिपाने या नामांतरण की प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को गंभीर माना गया है।
भौतिक सत्यापन नहीं करने पर दो पटवारियों पर गिरी गाज
डिजिटल फसल सर्वेक्षण में लापरवाही के मामले में बागबाहरा क्षेत्र के पटवारी कंचन साहू और लुकेश यादव को भी निलंबित किया गया है। दोनों पर सर्वेक्षण के दौरान खेतों का भौतिक सत्यापन नहीं करने का आरोप है।
फसल सर्वेक्षण का उद्देश्य खेतों में बोई गई फसलों और कृषि संबंधी वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाना है। इस प्रक्रिया में मौके पर जाकर सत्यापन करना महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि दर्ज की गई जानकारी और खेतों की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर न रहे। भौतिक सत्यापन नहीं होने से सर्वेक्षण की सटीकता पर सवाल उठ सकते हैं। इसी तरह की लापरवाही को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दोनों पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन
प्रशासन के अनुसार, संबंधित पटवारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। उनसे मामलों में स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद संबंधित एसडीएम ने निलंबन के आदेश जारी किए।
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कार्रवाई के पीछे राजस्व कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना और सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव में लापरवाही पर अंकुश लगाना प्रमुख उद्देश्य माना जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में लगाए गए आरोपों और विभागीय कार्रवाई को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित जांच एवं प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
निलंबन के दौरान तहसील कार्यालय रहेगा मुख्यालय
निलंबित किए गए पांचों पटवारियों का मुख्यालय निलंबन अवधि के दौरान संबंधित तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।महासमुंद जिले में हुई इस कार्रवाई ने राजस्व विभाग के कामकाज और डिजिटल सर्वेक्षण की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की गंभीरता को सामने ला दिया है। सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से लेकर फसल सर्वेक्षण तक, राजस्व से जुड़े कार्यों में सटीकता और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। प्रशासन की इस सख्ती को कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

