रायपुर : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने रायपुर की विशेष न्यायालय में छठवां अभियोग पत्र दाखिल किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं का एक सिंडिकेट शराब सप्लाई, कमीशन वसूली और अवैध बिक्री के जरिए अरबों रुपए का घोटाला करता रहा।
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सिंडिकेट का खुलासा
EOW के अनुसार, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल, अरविंद सिंह सहित कई अधिकारी और कारोबारी मिलकर इस अवैध नेटवर्क को चलाते थे। सरकारी शराब दुकानों पर कमीशन वसूली, डिस्टलरी में अतिरिक्त शराब बनाकर अवैध बिक्री, और विदेशी शराब की सप्लाई में भी गड़बड़ी की गई।
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248 करोड़ का नुकसान ठेका कंपनियों के कारण
साल 2020-21 में लागू नई आबकारी नीति के तहत विदेशी शराब की सप्लाई के ठेके तीन निजी कंपनियों—ओम साई ब्रेवरेज, नेक्सजेन पावर इंजिटेक, और दिशिता वेंचर्स—को दिए गए। इस ठेके के कारण राज्य सरकार को लगभग 248 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बड़े लेन-देन और रिश्वतखोरी
ओम साई ब्रेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को मुख्य लाभार्थी बताया गया है, जिन्हें 14 करोड़ रुपये मिले। वहीं, नेक्सजेन पावर इंजिटेक से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को कुल मिलाकर करीब 11 करोड़ रुपए मिले। यह रकम डमी डायरेक्टरों और अलग-अलग खातों के माध्यम से निकाली गई।
गिरफ्तारी और आगे की जांच
EOW ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। जांच एजेंसी ने बताया कि यह सिंडिकेट 2020 से 2023 तक सक्रिय रहा और इसे राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था। विदेशी शराब कमीशन से जुड़े मामले की जांच अभी जारी है।
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राजनीतिक हलचल तेज
3200 करोड़ के इस घोटाले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माता नजर आ सकता है।











