Friday, September 18, 2026
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CG News: ‘सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए’, झीरम घाटी केस जांच पर सवाल उठाने वाले नेताओं पर विजय शर्मा का बयान

Jhiram Ghati Case: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- झीरम घाटी मामले में जगदलपुर की एनआईए अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एनआईए की जांच को लेकर कहा कि जांच एजेंसी ने मामले में सटीक तरीके से काम किया है और जांच पर बेवजह सवाल उठाए गए।उप मुख्यमंत्री ने मामले में आरोपियों और अब तक हुई कानूनी कार्रवाई को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, इस मामले में एनआईए ने कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया था। हालांकि, उनके बताए आंकड़ों और अदालत के फैसले से जुड़े सभी विवरणों की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट होना बाकी है।

विजय शर्मा के अनुसार, झीरम घाटी मामले की जांच में एनआईए ने 39 लोगों को आरोपी बनाया था। उनके मुताबिक, ये आरोपी माओवादी संगठन के अलग-अलग पदों पर बताए गए थे।उन्होंने कहा कि इनमें से 9 लोग अब सक्रिय नहीं हैं, जबकि 11 लोगों के मामले में अदालत का फैसला आ चुका है। विजय शर्मा के अनुसार, इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है और 14 लोग आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन जी रहे हैं।इन आंकड़ों को उप मुख्यमंत्री ने अपनी जानकारी के आधार पर बताया है। मामले में आरोपियों की कानूनी स्थिति और अदालत से जुड़े अंतिम रिकॉर्ड के लिए आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

NIA जांच पर उठे सवालों का भी किया जिक्र
झीरम घाटी मामले की जांच लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। विपक्ष की ओर से जांच को लेकर सवाल उठाए जाने का मुद्दा भी समय-समय पर सामने आता रहा है।विजय शर्मा ने एनआईए की जांच का बचाव करते हुए कहा कि एजेंसी ने मामले की जांच सटीक तरीके से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पर बेवजह राजनीति करने की कोशिश की गई।उनके बयान के बाद झीरम घाटी केस को लेकर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है। इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों की जांच और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राय रही है।
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‘सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए’
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस की ओर से झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर उठाए गए सवालों का भी विजय शर्मा ने जिक्र किया। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी के पास मामले से जुड़े सबूत थे तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखा जाना चाहिए था।विजय शर्मा ने कहा कि भूपेश बघेल ने पांच साल मुख्यमंत्री के रूप में सरकार चलाई और यदि उनके पास कोई सबूत थे तो उन्हें जांच एजेंसी को दिए जाने चाहिए थे।यह टिप्पणी विजय शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के रुख पर की गई राजनीतिक प्रतिक्रिया है। दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

‘जहां बात करनी चाहिए, वहां जाकर बात करें’
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के पास जांच एजेंसियों के सामने अपनी बात रखने का विकल्प खुला हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास झीरम घाटी मामले से संबंधित कोई जानकारी या सबूत है तो वह जांच एजेंसी के सामने उसे रख सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जगहों पर इस विषय पर चर्चा करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन एजेंसियों के सामने सबूत या जानकारी रखी जानी चाहिए, वहां जाकर अपनी बात रखी जानी चाहिए।

झीरम घाटी केस में राजनीतिक बहस जारी
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।घटना के बाद से इसकी जांच, हमले के पीछे की साजिश और जिम्मेदार लोगों को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच और राजनीतिक बहस होती रही है। एनआईए की जांच को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।अब अदालत के फैसले और विजय शर्मा के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अन्य संबंधित मामलों में होने वाली कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

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