निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में सीटी स्कैन और गामा कैमरा मशीन की खरीदी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अनुशंसा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संभावित आरोपी को आपराधिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपनी बात रखने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला अस्पताल में अत्याधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन डायग्नोस्टिक सेंटर की स्थापना से जुड़ा है। मुंबई की एक कंपनी ने ‘टर्नकी प्रोजेक्ट’ के तहत प्रस्ताव दिया था, जिसे 2018 में स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के पास भेजा गया।
तत्कालीन संयुक्त निदेशक-सह-अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी ने इस प्रस्ताव पर अपनी राय देते हुए इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल में लागू करने का सुझाव दिया था।बाद में खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत सामने आने पर सरकार ने जांच शुरू की।
जांच में सामने आई अनियमितताएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित की गई। जांच रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ियों और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के संकेत मिले।
इसके आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव ने अगस्त 2021 में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अनुशंसा की।
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कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस बिभु दत्त गुरु की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली में FIR दर्ज होने से पहले संभावित आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं दिया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला किसी असाधारण श्रेणी में नहीं आता, जहां हस्तक्षेप जरूरी हो। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं स्पष्ट हैं, इसलिए आगे की जांच जरूरी है।
जांच पर नहीं लगेगी रोक
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना जांच को समय से पहले रोकने जैसा होगा। यह तय करना कि याचिकाकर्ता दोषी हैं या नहीं, विस्तृत जांच और ट्रायल के बाद ही संभव है।
सार्वजनिक धन से जुड़ा मामला, बढ़ी गंभीरता
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामला बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन से जुड़ा है, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जांच आवश्यक है।
👉 इस फैसले के बाद अब मामले में FIR दर्ज होने और आगे की जांच का रास्ता साफ हो गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।











