सरगुजा (अंबिकापुर)। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में गरीबों के हक के राशन में लाख रुपए से अधिक का बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी राशन दुकानों से चावल, शक्कर और चना की बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी की गई है।
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इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ जब भाजपा नेता आलोक दुबे ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर हुई जांच के बाद, खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर सहकारी समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत कुल लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज की गई है।
जांच में क्विंटल चावल समेत अन्य राशन गायब
शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने फूड इंस्पेक्टर से राशन दुकानों की भौतिक जांच कराई। जांच में सामने आया कि जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित राशन दुकानों में जितना स्टॉक होना चाहिए, उतना मौजूद नहीं था।
जांच में निम्नलिखित राशन गायब मिला:
- चावल: क्विंटल
- चना: क्विंटल
- शक्कर: इसमें भी बड़े पैमाने पर घोटाला पाया गया।
यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी राशन को निजी दुकानों और राशन माफिया को बेच दिया गया था।
आरोपियों के खिलाफ दर्ज
फूड इंस्पेक्टर शिव कुमार मिश्रा की रिपोर्ट पर, पुलिस ने राशन दुकान संचालन एजेंसी के पदाधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। आरोपियों में अध्यक्ष पवन सिंह, उपाध्यक्ष सुनिता पैकरा, और सहायक विक्रेता फरहान सिद्धीकी, प्रिंस जायसवाल, सैफ अली, मुकेश यादव शामिल हैं।
पुलिस ने गठित की टीम, जोड़ी की धारा
दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की हैं। शुरुआती जांच में आरोपियों पर ऐसी हल्की धाराएं लगाई गई थीं, जिनमें उन्हें थाने से ही जमानत मिल सकती थी। हालांकि, शिकायतकर्ता भाजपा नेता आलोक दुबे द्वारा पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दिए जाने के बाद, अब अपराध की गंभीरता को देखते हुए धारा (आपराधिक विश्वासघात) भी जोड़ दी गई है।
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अंबिकापुर में कुल सरकारी राशन दुकानें हैं, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दूसरे राशन दुकानों के संचालकों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।











