CG NEWS : गौरीशंकर गुप्ता/बिलासपुर। रायगढ़ जिले के एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवाद ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तहलका मचा दिया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के विवादास्पद आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को सबूत मानने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि फैमिली कोर्ट में चल रहे केसों में तकनीकी अड़चनों के नाम पर अहम सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
CG NEWS : यह फैसला न केवल रायगढ़ के इस ‘वैवाहिक महायुद्ध’ को नया मोड़ देगा, बल्कि पूरे राज्य के फैमिली कोर्ट्स के लिए नजीर बनेगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिजिटल साक्ष्य जैसे CCTV फुटेज को खारिज करने के लिए ‘तकनीकी बहाने’ अब काम नहीं आएंगे।
CG NEWS : केस का बैकग्राउंड: रायगढ़ का हाई-प्रोफाइल दांपत्य विवाद
CG NEWS : रायगढ़ जिले के एक प्रमुख परिवार से जुड़ा यह मामला पिछले दो वर्षों से फैमिली कोर्ट में चल रहा था। पति-पत्नी के बीच संपत्ति बंटवारे, मेंटेनेंस और बच्चों की कस्टडी को लेकर तीखी भिड़ंत चल रही थी। पत्नी पक्ष ने एक निजी होटल में हुई घटना का सीसीटीवी फुटेज पेश किया, जिसमें पति के कथित दुर्व्यवहार को कैद किया गया था। लेकिन फैमिली कोर्ट जज ने सीडी को ‘तकनीकी खराबी’ का हवाला देकर खारिज कर दिया, जिसके बाद पत्नी पक्ष हाईकोर्ट पहुंचा।
CG NEWS : हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीसीटी्वी विशेषज्ञों की राय ली और पाया कि फुटेज पूरी तरह वैध है। बेंच ने टिप्पणी की, “आधुनिक युग में डिजिटल साक्ष्य न्याय का आधार हैं। तकनीकी छोटी-मोटी कमियों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता।”
CG NEWS : हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: डिजिटल सबूतों को मान्यता
CG NEWS : डिवीजन बेंच ने 45 पेज के विस्तृत फैसले में कई अहम बिंदु रखे। पहला, फैमिली कोर्ट को डिजिटल साक्ष्य जमा करने के लिए फोरेंसिक जांच का आदेश देना चाहिए था, न कि सीधे खारिज करना। दूसरा, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत प्रमाणित डिजिटल साक्ष्य मान्य हैं। तीसरा, वैवाहिक मामलों में महिलाओं के पक्ष को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य है।
CG NEWS : कोर्ट ने महासमुंद फैमिली कोर्ट को निर्देश दिए कि मामले को तीन माह में निपटाए और सीसीटीवी फुटेज को मुख्य साक्ष्य माना जाए। इस फैसले से रायगढ़ के इस केस में पत्नी पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
CG NEWS : बिलासपुर के वरिष्ठ वकील डॉ. एल.के. शर्मा ने कहा, “यह फैसला डिजिटल इंडिया के अनुरूप है। अब फैमिली कोर्ट्स को फोरेंसिक लैब से साक्ष्य सत्यापन कराना होगा।” महिला आयोग की सदस्य सुनीता वर्मा ने इसे ‘महिलाओं के लिए न्यायिक क्रांति’ बताया। उन्होंने कहा कि वैवाहिक विवादों में अक्सर पुरुष पक्ष तकनीकी बहानों का सहारा लेते हैं, जो अब बंद हो जाएगा।
CG NEWS : कानूनी हलकों में चर्चा है कि यह फैसला अन्य राज्यों के हाईकोर्ट्स के लिए भी बेंचमार्क बनेगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुरूप चलते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ किया कि न्याय में देरी या तकनीकी अड़चनें बर्दाश्त नहीं।
CG NEWS : छत्तीसगढ़ में 18 फैमिली कोर्ट्स हैं, जहां प्रतिवर्ष 5000 से अधिक वैवाहिक मामले दर्ज होते हैं। इस फैसले के बाद जजों को डिजिटल साक्ष्य हैंडलिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सभी फैमिली कोर्ट्स को सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए हैं। अब मामलों में मोबाइल रिकॉर्डिंग, वॉट्सऐप चैट और सोशल मीडिया पोस्ट भी प्रमुख साक्ष्य होंगे।
रायगढ़ जिला बार एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया। अध्यक्ष रामेश्वर साहू ने कहा, “यह आम आदमी के लिए न्याय आसान बनाएगा।” दूसरी ओर, कुछ वकीलों का मानना है कि इससे केसों का बोझ बढ़ेगा, क्योंकि हर साक्ष्य की फोरेंसिक जांच जरूरी हो गई।
CG NEWS : पिछले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ में वैवाहिक विवाद 30% बढ़े हैं। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों में संपत्ति और कस्टडी विवाद प्रमुख हैं। इस फैसले से अब याचिकाकर्ता आसानी से डिजिटल प्रूफ जमा कर सकेंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे फैसले की गति 20% तेज होगी।
महासमुंद फैमिली कोर्ट के जज ने फैसले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। लेकिन स्रोतों के अनुसार, कोर्ट अब साक्ष्य सत्यापन के लिए स्थानीय फोरेंसिक टीम से संपर्क करेगा।
CG NEWS : हाईकोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट जजों के लिए डिजिटल फोरेंसिक कोर्स अनिवार्य हो। राज्य सरकार ने 50 करोड़ का बजट डिजिटल साक्ष्य लैब के लिए मंजूर किया है। बिलासपुर में नई फोरेंसिक वैन भी शुरू हो रही है।
CG NEWS : यह फैसला रायगढ़ के उस हाई-प्रोफाइल परिवार के लिए अंतिम अध्याय लिखेगा। पति पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जा सकता है, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का फैसला मजबूत है। वैवाहिक मामलों में अब CCTV, ड्रोन फुटेज और AI विश्लेषण प्रमुख हथियार बनेंगे।
CG NEWS : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साबित कर दिया कि न्याय तकनीक से परे नहीं भाग सकता। यह फैसला न केवल रायगढ़ तक सीमित रहेगा, बल्कि पूरे देश के फैमिली ज्यूडिशियरी को दिशा देगा।













