Sunday, August 16, 2026
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CG NEWS: छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 बच्चे भी कैद: मां के जुर्म की सजा मासूमों को भी, पढ़िए ये खबर

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CG NEWS: रायपुर: देश की जेलों में महिला कैदियों के साथ उनके बच्चों के रहने के मामलों में छत्तीसगढ़ का स्थान छठा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां 311 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ जेल में हैं।

 

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इसके बाद पश्चिम बंगाल में 170, बिहार में 167, मध्यप्रदेश में 126, झारखंड में 84 और छत्तीसगढ़ की विभिन्न जेलों में 60 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जेल का माहौल बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। प्रशासन द्वारा विशेष सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति अब भी चिंताजनक है।

CG NEWS: छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद 60 महिला कैदियों के छोटे बच्चे अपनी माताओं के साथ रह रहे हैं। मां के अपराध की सजा जैसे ये बच्चे भी झेल रहे हैं। आंकड़े 31 दिसंबर 2023 तक के हैं। महिला कैदियों के लिए अलग बैरक की व्यवस्था की जाती है, और छह वर्ष से छोटे बच्चों को मां के साथ रखने का नियम है, जिसके कारण उन्हें भी जेल में रहना पड़ता है।

CG NEWS: एनसीआरबी के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ जेलों में हैं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी हैं, जिनके साथ 1,191 बच्चे रह रहे हैं, जबकि 249 दोषसिद्ध कैदी 272 बच्चों के साथ जेल में हैं। यह स्थिति बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न करती है।

CG NEWS: बाल अधिकार कार्यकर्ता सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को महिला कैदियों के बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल, पालन-पोषण और शिक्षा की मजबूत व्यवस्था करनी चाहिए ताकि उनका बचपन जेल की दीवारों के भीतर सीमित न रह जाए। जेल का वातावरण न तो सुरक्षित है और न ही बच्चों के विकास के अनुकूल। कुछ राज्यों में बाल संरक्षण नीति के तहत कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन यह अभी पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं हो पाया है।

CG NEWS: विशेषज्ञों के अनुसार, जेल का माहौल बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। खेल, शिक्षा और पोषण की सुविधाएं सीमित हैं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास बाधित होता है। कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं कही जा सकती।

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