CG Liquor Scam : रायपुर, छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले से 2,174 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अवैध रूप से बंटवारा किया गया। आरोप है कि इस घोटाले में राजनेता, सरकारी अधिकारी और कारोबारी शामिल थे।
CG Liquor Scam : क्या है पूरा मामला?
जांच के मुताबिक, यह घोटाला FL-10 (फॉरेन लिकर-10) लाइसेंस के जरिए किया गया। EOW ने बताया कि अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट ने सरकारी शराब दुकानों पर कमीशन तय किया, नकली होलोग्राम वाली शराब की सप्लाई की, और विदेशी ब्रांडों की बिक्री से अवैध कमाई की।
यह सिंडिकेट राज्य के कई जिलों जैसे रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, महासमुंद, धमतरी, कोरबा और रायगढ़ में सक्रिय था।
किसे मिला कितना हिस्सा?
जांच में सामने आया कि 2,174 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा नेताओं और मंत्रियों को मिला।
- नेताओं-मंत्रियों: 1,392 करोड़ 45 लाख रुपये
- तीन शराब डिस्टिलर्स: 358 करोड़ 65 लाख रुपये
- अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा: 181 करोड़ 52 लाख रुपये
- आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी: 181 करोड़ 52 लाख रुपये
- विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह: 60 करोड़ 50 लाख रुपये
आरोपियों की भूमिका
EOW की जांच में विभिन्न आरोपियों की भूमिका का भी खुलासा हुआ है:
- अनिल टुटेजा: सिंडिकेट के संरक्षक के रूप में काम किया।
- अनवर ढेबर: सिंडिकेट का गठन किया और पैसों का बंटवारा किया।
- एपी त्रिपाठी: होलोग्राम, कैश कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन को नियंत्रित किया।
- विकास अग्रवाल: नकली होलोग्राम वाली शराब की सप्लाई और पैसों की वसूली की।
- अरविंद सिंह: नकली बोतल और होलोग्राम की सप्लाई की।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच कर रही है और अब तक 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का जिक्र किया है।













