CG News: दंतेवाड़ा में बच्ची बन रही पत्थर! इस बीमारी से डॉक्टर भी भौंचक्के, मदद के नाम पर यूट्यूबर्स का तमाशा

Rahul Goshwami

Dantewada Rare Skin Disease: दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग का मामला छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है। दंतेवाड़ा जिले की एक नाबालिग आदिवासी बच्ची एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक त्वचा रोग से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण उसकी त्वचा धीरे-धीरे सख्त और खुरदुरी होती जा रही है, जिससे उसका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग से जूझ रही बच्ची की हालत समय के साथ गंभीर होती गई। परिवार के लिए इलाज का खर्च उठाना आसान नहीं था। बीमारी की जानकारी सामने आने के बाद कई लोगों ने उसकी मदद के लिए आगे आने की इच्छा जताई।

यूट्यूब वीडियो के जरिए मांगी गई सहायता
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित बच्ची की स्थिति को लेकर कुछ यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स ने वीडियो बनाकर लोगों से आर्थिक सहायता की अपील की। परिवार के पास बैंक खाता नहीं होने के कारण सहायता राशि प्राप्त करने के लिए यूट्यूबर्स के बैंक खातों की जानकारी साझा की गई थी। इसके बाद कई लोगों ने बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद भेजी।

मदद राशि को लेकर उठे सवाल
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग मामले में बाद में यह शिकायत सामने आई कि लोगों द्वारा भेजी गई सहायता राशि का पूरा हिस्सा परिवार तक नहीं पहुंचा। शिकायत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू की गई।
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बाल आयोग ने लिया संज्ञान
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हस्तक्षेप किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई ताकि सहायता राशि के उपयोग और वितरण की स्थिति स्पष्ट हो सके।

जांच में सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि सहायता राशि का कुछ हिस्सा परिवार तक नहीं पहुंचा था। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शेष राशि परिवार को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद मामले को लेकर आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

बेहतर इलाज के लिए एम्स भेजने की तैयारी
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बाल आयोग ने विशेष कदम उठाया है। आयोग बच्ची को एम्स जैसे उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराने की अनुशंसा कर रहा है, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार हो सके।

परिवार को मिली नई उम्मीद
दंतेवाड़ा दुर्लभ त्वचा रोग के इस मामले में प्रशासन और बाल आयोग की पहल से परिवार को राहत मिली है। विशेषज्ञ उपचार मिलने की संभावना से बच्ची और उसके परिजनों में नई उम्मीद जगी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उचित इलाज मिलने से जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

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