मुंबई। Nishaanebaz.com-RBI MPC Meeting Action: यदि आप किसी भी बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन चुका रहे हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी बैठक आपके मासिक बजट पर सीधा असर डाल सकती है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने जा रही है, जिसके फैसलों का औपचारिक ऐलान 7 अक्टूबर को किया जाएगा। देश में बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट को देखते हुए RBI एक बार फिर रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकता है।
वर्तमान में RBI का रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। हालांकि, वित्तीय बाजार और बैंकिंग विशेषज्ञों की प्रबल संभावना है कि केंद्रीय बैंक इस बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर सकता है।
क्यों बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
केंद्रीय बैंक देश की आर्थिक स्थिति और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट में बदलाव करता है। इस बार RBI के सामने कई ऐसी चुनौतियां हैं जो नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का संकेत दे रही हैं:
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बढ़ती महंगाई: अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 4.82% तक पहुंच गई, जो जुलाई में 4.45% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में अनिश्चितता बनी हुई है।
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कच्चे तेल में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ रहा है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ता है।
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रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मूल्य कमजोर होना भी महंगाई के दबाव को बढ़ा रहा है।
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वैश्विक प्रभाव: अमेरिका समेत दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में किए जा रहे बदलावों और बॉन्ड यील्ड का असर भारतीय वित्तीय बाजार पर दिख रहा है।
क्या 6% तक पहुंचेगा रेपो रेट?
यूनियन बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, RBI अक्टूबर की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है और इसके बाद वित्त वर्ष 2027 के दौरान एक या दो और चरणबद्ध बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आने वाले समय में रेपो रेट बढ़कर 5.75% से 6% तक पहुंचने का अनुमान है।
आपकी EMI पर क्या पड़ेगा असर?
यदि RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो व्यावसायिक बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से फंड लेना महंगा हो जाएगा। बैंक इस बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव फ्लोटिंग रेट (Floating Rate) वाले होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन ग्राहकों पर पड़ेगा। ब्याज दरें बढ़ने के बाद या तो ग्राहकों की प्रतिमाह दी जाने वाली EMI की राशि बढ़ जाएगी या फिर उनके लोन की समयावधि (Tenure) लंबी हो जाएगी।






