Burhanpur News: गोपाल देवकर/ बुरहानपुर : बुरहानपुर जिले सहित समुचे भारतवर्ष में श्रद्धा और भक्ति से पूजी जाने वाली यह मुर्गे पर विराजित माता बहुचरा है जो 85 वर्ष पूर्व बुरहानपुर के श्री सकलपंच गुजराती मोढ़ वणिक समाज के बाबूलाल टीकमदास दलाल ने श्रद्धा भक्ति के साथ गुजरात के बहुचराजी से एक नारियल श्रद्धापूर्वक लाया था और उसके बाद मनोकामना पूर्ण होने पर उन्होंने जयपुर से संगमरमर की सफेद पत्थर से निर्मित माँ बहूचरा की प्रतिमा लाकर धूमधाम से स्थापित की थी, माना जाता है कि बहुचरा माता का मूल स्थान बहुचराजी है तो वहीं पास ही में दो किलोमीटर दूर संखलपुर को माता का उद्गम स्थान भी कहा जाता है।
Burhanpur News: बुरहानपुर जिले के राजपुरा में स्थित बहुचरा माता का यह मंदिर आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है यह मंदिर किसी अस्पताल से कम नहीं यहां जो भी दुखियारा आता है उसके दुख ,पाप नाश हो जाते हैं और रोते हुए आता है और हंसते हुए जाता है कहा जाता है कि यह मंदिर में 85 वर्ष पूर्व गुजराती मोड समाज के बाबूलाल दलाल ने बहुचराजी से एक नारियल लाकर इसकी स्थापना की थी और उनकी और समाज जनों ने खूब पूजा अर्चना की।
Burhanpur News: जिससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर उन्होंने जयपुर से सफेद पत्थर की मुर्गे पर विराजित बहुचरा माता की प्रतिमा लाकर स्थापना की तब से लेकर आज तक सभी समाजन चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां पहुंचकर पूजा आराधना करते हैं यही नहीं यह माता समाज की पूजनीय और मंगलदायिनी भी है समाज में किसी भी परिवार में कोई भी मंगल कार्य के पूर्व माता को उसके निशान के रूप में घर परिवार में लाते हैं और उसके बाद ही मंगल कार्य प्रारंभ होते हैं कहा जाता है कि यह माता बहुत ही चमत्कारी और दयालु है जो भी प्रेम से मांगो वह मुराद पूरी कर देती है।
Burhanpur News: बहुचर माता का उद्गम स्थान वैसे तो संखलपुर है किंतु बहुचर जी जहां मां बहुचरा जाकर विराजित हुई थी उसे मूल स्थान माना गया है सभी समाज जन बहुचराजी ना जाकर इस बुरहानपुर जिले में स्थित बहुचरा मंदिर पहुंचकर मां बहुचरा की आराधना करते हैं और सबकी मनोकामना पूर्ण होती है चैत्र नवरात्रि में नो दिन और शारदीय नवरात्रि में 22 दिनो तक मां बहूचरा की पूजा अर्चना करते हैं यही नहीं शारदीय नवरात्र में 22 दिनों तक मां अंबा का गरबा लाकर धूमधाम से गरबे भी खेलते हैं।
Burhanpur News: कहा जाता है कि जो भी माँ के दरबार में मुराद लेकर पहुंचता है यह मुर्गी पर बैठी मां बहुचरा उसकी मुराद पूरी करती है हमारे संवाददाता गोपाल देवकर ने समाजजनों से चर्चा की और जाना माता का महत्व –











