Burhanpur Navratri Special Story : बुरहानपुर : शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर बुरहानपुर में एक अनोखी और प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित किया गया है। देवकर परिवार के सदस्यों, लोकेश देवकर और सारिका देवकर ने, 200 साल पुरानी ‘पगघड़ी’ परंपरा का पालन करते हुए, माता अंबा की गरबा मूर्ति का अपने घर में स्वागत किया।
‘पगघड़ी’ एक ऐसी परंपरा है जिसमें देवी के स्वागत के लिए जमीन पर वस्त्र या चादरें बिछाई जाती हैं, ताकि उनके चरण सीधे भूमि को न छुएं। यह माना जाता है कि ऐसा करने से देवी अंबा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। यह परंपरा इस विश्वास को दर्शाती है कि देवी को ‘पालकों पर बिठाकर’ लाया जाता है, यानी उन्हें अत्यधिक सम्मान और आदर दिया जाता है।
पिछले साल, गोपाल देवकर और अनीता देवकर ने भी इसी परंपरा से माता का स्वागत किया था। अनीता देवकर बताती हैं कि पिछले 30 सालों में जब भी उन्होंने मां से कोई मन्नत मांगी है, वह हमेशा पूरी हुई है। उनके परिवार में जब भी कोई शुभ कार्य होता है, तो वे मां अंबा का स्वागत जरूर करते हैं। परिवार के मुखिया भारत भूषण देवकर और मीना देवकर भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मां के आगमन से उनके घर में हमेशा सुख-समृद्धि और शुभ कार्य होते हैं।
इस वर्ष, शरद देवकर और वनीता देवकर ने अपने नए घर में प्रवेश से पहले मां अंबा का स्वागत करने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि नए घर में माता का वास होने से किसी भी तरह की विपत्ति नहीं आती और घर में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।
यह अनूठी परंपरा न केवल परिवार की आस्था को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सदियों पुरानी मान्यताएं आज भी लोगों के जीवन में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं।