Thursday, September 24, 2026
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Bilaspur News : 1500 रुपए रिश्वत मामले में 21 साल बाद न्याय: हाईकोर्ट ने तहसील कार्यालय के पूर्व क्लर्क बाबूराम पटेल को किया दोषमुक्त, कहा केवल नोट बरामदगी से आरोप साबित नहीं होता

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Bilaspur News : बिलासपुर। बिल्हा तहसील कार्यालय के पूर्व रीडर/क्लर्क बाबूराम पटेल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लगे आरोपों से हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने रिश्वत मांगी या स्वीकार की। यह फैसला न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने सुनाया।

 

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Bilaspur News : मामला 2002 का है, जब शिकायतकर्ता मथुरा प्रसाद यादव ने आरोप लगाया था कि बाबूराम पटेल ने जमीन का खाता अलग करने के नाम पर 5000 रुपये रिश्वत मांगी, जो बाद में 2000 रुपये पर तय हुई। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई की, जिसमें 1500 रुपये रिश्वत लेने का आरोप था। पहले_instance में पटेल को एक-एक वर्ष की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

Bilaspur News : बाबूराम पटेल ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी और बताया कि मामला झूठा है। आरोप लगाने वाले परिवार से निजी दुश्मनी थी और 1500 रुपये रिश्वत नहीं, बल्कि पट्टा शुल्क की वसूली थी। साथ ही, बरामद नोटों की राशि भी विवादास्पद थी।

Bilaspur News : हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल नोटों की बरामदगी से रिश्वत साबित नहीं होती जब तक मांग और स्वीकार का ठोस सबूत न हो। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं कहा कि उसे पता नहीं था कि पैसे रिश्वत हैं या पट्टा शुल्क। ट्रैप टीम के बयान भी विरोधाभासी थे। इसलिए, संदेह का लाभ आरोपी को दिया गया। अंततः हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए बाबूराम पटेल को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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