नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि टीचिंग सर्विस से जुड़े सभी शिक्षकों के लिए अपनी सर्विस में बने रहने और प्रमोशन पाने के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य होगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह आदेश दिया।
निर्णय के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें TET क्वालिफाई करना अनिवार्य होगा। यदि कोई शिक्षक यह पात्रता नहीं पूरी करता है तो उसे इस्तीफा देना होगा या कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना पड़ेगा। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा में केवल 5 साल शेष हैं, उन्हें इस आदेश से राहत दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह निर्देश माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशंस पर लागू होगा या नहीं, इसका फैसला बड़ी बेंच करेगी। यह आदेश तमिलनाडु और महाराष्ट्र में टीचिंग के लिए TET अनिवार्यता से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है।
टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8) में शिक्षक बनने की योग्यता तय करती है। यह परीक्षा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 2010 में अनिवार्य की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश RTE एक्ट, 2009 की धारा 23(1) और NCTE द्वारा 2010 में जारी नियमों के तहत आया है। पहले मद्रास HC ने कहा था कि 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए TET अनिवार्य नहीं, लेकिन प्रमोशन के लिए अनिवार्य है। अब सुप्रीम कोर्ट ने सेवा में बने रहने और प्रमोशन दोनों के लिए TET पास करना जरूरी कर दिया है।











