Saturday, August 15, 2026
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Bharatmala Project : आज बड़ा खुलासा संभव : भारतमाला परियोजना के मुआवजा घोटाले पर होगी समीक्षा बैठक……..

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Bharatmala Project : आज बड़ा खुलासा संभव
Bharatmala Project : आज बड़ा खुलासा संभव

Bharatmala Project : रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकॉनामिक कॉरिडोर के भू-अर्जन मामलों में दर्जनों किसानों की आपत्तियों और शिकायतों का निपटारा तय समयसीमा के भीतर नहीं हो पाया है। शासन के निर्देश पर रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे ने जांच के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित की थीं, जिन्हें एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन महीना बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

Bharatmala Project : जांच में देरी के चलते संभागायुक्त ने 4 अगस्त को विशेष समीक्षा बैठक बुलाकर प्रगति की रिपोर्ट तलब की है। अपर कलेक्टरों की अध्यक्षता में गठित इन टीमों को रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर के भू-अर्जन मामलों में प्राप्त डेढ़ सौ से अधिक दावा-आपत्तियों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इन टीमों में ज्योति सिंह, उमाशंकर बंदे, निधि साहू और इंदिरा देवहारी को प्रमुख बनाया गया था, लेकिन अभी तक किसी भी टीम की रिपोर्ट शासन तक नहीं पहुंची है।

Bharatmala Project

भारतमाला परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण में अनियमितता और किसानों को उचित मुआवजा न मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में भी करीब 250 मामलों की जांच प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। यहां भी प्रभावित किसानों ने मुआवजा कम मिलने की शिकायतें संभागायुक्त के समक्ष रखी हैं। दुर्ग संभागायुक्त एसएन राठौर का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी बड़ी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसानों की आपत्तियों का निराकरण अभी लंबित है।

सरकारी अमले की धीमी कार्यप्रणाली और टालमटोल रवैये के चलते किसानों में आक्रोश पनप रहा है। भू-अर्जन में पारदर्शिता और त्वरित समाधान की मांग को लेकर किसान संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। शासन की सख्त मंशा के बावजूद ज़मीनी स्तर पर जांच प्रक्रिया की रफ्तार बेहद सुस्त है, जिससे भारतमाला परियोजना के इस अहम कॉरिडोर पर सवाल उठने लगे हैं।

अब 4 अगस्त को होने वाली समीक्षा बैठक में जांच की प्रगति को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। शासन की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि मुआवजा घोटाले की आंच सरकार तक पहुंचने लगी है।

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