Bharatiya Kisan Sangh: रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय किसान संघ ने अपनी मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। संघ के आह्वान पर अलग-अलग जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान ट्रैक्टरों के साथ रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
किसानों की प्रमुख मांगों में 2022-23 की धान खरीदी का करीब 1700 करोड़ रुपये बकाया भुगतान, धान का उचित समर्थन मूल्य, खाद की उपलब्धता, सिंचाई, बिजली, गन्ने का दाम, फसल नुकसान का मुआवजा, गौ वंदन योजना और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
1700 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग
भारतीय किसान संघ का कहना है कि 2022-23 की धान खरीदी की करीब 1700 करोड़ रुपये की राशि अब भी किसानों को नहीं मिली है। संघ ने सरकार से यह राशि जल्द जारी करने की मांग की है।
संघ ने धान की खरीदी 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की भी मांग की है। इसके साथ ही सब्जी और फल उत्पादक किसानों को भी कृषक उन्नति योजना का लाभ देने की मांग रखी गई है।
धान खरीदी में कटौती का विरोध
किसान संघ ने धान खरीदी के दौरान अतिरिक्त वजन लिए जाने का विरोध किया है। संघ की मांग है कि प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान ही लिया जाए। साथ ही बड़े किसानों के लिए 5 टोकन और छोटे व सीमांत किसानों के लिए 3 और 1 टोकन की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा
संघ ने हाल की बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों का खेत-खेत सर्वे कराने और जल्द मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा किसानों को निर्धारित कीमत पर खाद उपलब्ध कराने और अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
सिंचाई परियोजनाएं जल्द पूरी करने की मांग
भारतीय किसान संघ ने अरपा-भैंसाझार समेत अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है। संघ का कहना है कि सिंचाई की समस्या के कारण किसानों को हर साल सूखा और अनियमित बारिश का सामना करना पड़ता है।
गन्ना, मक्का और गेहूं किसानों की मांगें
संघ ने गन्ने के दाम में 150 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी और इसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग की है। इसके अलावा मक्का और गेहूं की भी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
15 नवंबर से 15 फरवरी तक हो धान खरीदी
Bharatiya Kisan Sangh: किसान संघ ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक रखने की मांग की है। खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और टोकन प्रणाली में सुधार की भी मांग की गई है। भारतीय किसान संघ ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी समस्याओं को लगातार टालना उचित नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री से 12 सूत्रीय मांगों पर जल्द उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की है।
Bharatiya Kisan Sangh: संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर के गांवों से किसानों को जोड़कर बड़ा आंदोलन करने की बात कही गई है।






