बुरहानपुर : बुरहानपुर जिले के ग्राम भावसा, शाहपुर में आदिवासी समाज का पारंपरिक और ऐतिहासिक पर्व भगोरिया हाट हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। होली से पहले लगने वाला यह हाट आदिवासी संस्कृति, प्रेम और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
ढोल-मांदल की गूंज से गूंजा गांव
ढोल और मांदल की थाप के साथ भगोरिया हाट का शुभारंभ हुआ। आदिवासी युवक-युवतियां पारंपरिक परिधानों और चांदी के आभूषणों में सजे नजर आए। एक-दूसरे को गुलाल लगाकर समाजजनों ने पर्व की शुभकामनाएं दीं और पूरे वातावरण में उत्साह का रंग बिखर गया।
प्रेम और परंपरा का अनूठा संगम
भगोरिया हाट केवल एक बाजार नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। परंपरा के अनुसार इस हाट में युवक-युवतियां अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरे सम्मान के साथ निभाई जाती है।
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बाजार में उमड़ी भीड़, दिखी रौनक
हाट में झूले, खिलौने, पारंपरिक वस्त्र और खान-पान की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इस उत्सव में शामिल होने पहुंचे।
प्रशासन की रही विशेष व्यवस्था
कार्यक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
स्थानीय समाजजनों ने कहा, “भगोरिया हमारे पूर्वजों की परंपरा है। यह प्रेम और भाईचारे का पर्व है। हम इसे हर साल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं।”रंग, परंपरा और उत्साह से भरे इस भगोरिया हाट ने एक बार फिर आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।











