HomeNationalBRAHMAPUTRA : ब्रह्मास्त्र या ब्रह्मपुत्र-चीन ने किया मेगा डैम का काम चालू,...

BRAHMAPUTRA : ब्रह्मास्त्र या ब्रह्मपुत्र-चीन ने किया मेगा डैम का काम चालू, खतरनाक गेम प्लान शुरू

Date:

Related stories

Raipur News:देशभर के 65 डिजाइनर पहुंचे राजधानी, “रिवाज़” प्रदर्शनी का उदघाटन

Raipur News:रायपुर। राजधानी रायपुर के सायाजी होटल में तीन...

BRAHMAPUTRA : नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच भले ही सीमा विवाद सुलझाने की बातचीत जारी हो, लेकिन चीन ने अब एक नई रणनीतिक चाल चलते हुए तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग जांगबो) पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। यह डैम अरुणाचल प्रदेश की सीमा से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर बन रहा है। परियोजना की लागत करीब 168 अरब अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है और इसे चीन का ‘मेगा वॉटर प्रोजेक्ट’ कहा जा रहा है। डैम का निर्माण 20 जुलाई 2025 को शुरू हुआ, जिसमें 5 पनबिजली स्टेशन शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट सालाना 300 अरब किलोवाट बिजली पैदा करेगा, जो पूरे भारत की एक-चौथाई आबादी की बिजली ज़रूरतों के बराबर है।

भारत को क्यों है चिंता…

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डैम केवल ऊर्जा उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस क्षेत्र में डैम का नियंत्रण होने से चीन भविष्य में भारत के सीमावर्ती इलाकों में पानी की आपूर्ति को हथियार बना सकता है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस प्रोजेक्ट को “वॉटर बम” की संज्ञा दी है और कहा है कि “इस डैम से अगर चीन पानी छोड़ता है या रोकता है, तो भारत के कई पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ जैसी आपदा आ सकती है।”

पर्यावरणीय और भूगर्भीय खतरे

यह इलाका उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्र में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भारी-भरकम डैम प्रोजेक्ट से भूस्खलन, भूकंप और अन्य पर्यावरणीय जोखिम बढ़ सकते हैं। अगर किसी भी स्थिति में डैम को नुकसान होता है, तो उसका असर न केवल भारत, बल्कि बांग्लादेश तक भी विनाशकारी होगा।

भारत की रणनीतिक चुनौती

इस प्रोजेक्ट से साफ हो गया है कि चीन अब केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि “पानी” के ज़रिए भी दबाव बनाने की नीति अपना रहा है। भारत के पास इस नदी से जुड़ा कोई जल-संधि समझौता नहीं है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाती है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत को इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए।

Share The News
VIKASH KHALKHO
VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here