भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन इंदौर के भागीरथपुरा में कथित दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायकों ने हाथों में गंदे पानी से भरी बोतलें और नारे लिखी तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
जिम्मेदारी तय करने और इस्तीफे की मांग
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि दूषित पानी पीने से करीब 35 लोगों की मौत होना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार इस गंभीर मामले में जवाबदेही से बच रही है। कांग्रेस ने संबंधित मंत्री के नैतिक आधार पर इस्तीफे और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पूरे प्रदेश में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया।
स्वच्छ पानी को बताया बुनियादी अधिकार
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हर नागरिक तक साफ पानी पहुंचना जरूरी है, क्योंकि सभी लोग महंगा आरओ पानी खरीदने में सक्षम नहीं होते। उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण में किए गए दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया और इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग दोहराई।
बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक विवाद
इसी बीच एक भाजपा विधायक के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया। बयान में धार्मिक संदर्भों के साथ गौ संरक्षण से जुड़ी बात कही गई, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और इसे मुद्दे से भटकाने की कोशिश बताया।
संघर्ष जारी रखने का ऐलान
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन जारी रखेगी। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।













