भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन इंदौर के भागीरथपुरा में कथित दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने महात्मा गांधी प्रतिमा के सामने गंदे पानी की बोतलें और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई और इस्तीफे की मांग
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की जनता को दूषित जल पिलाया गया और पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में स्थानीय स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम कमिश्नर, एमआईसी सदस्य और नगरीय विकास मंत्री की जवाबदेही तय कर सरकार को उनसे इस्तीफा लेना चाहिए।
सरकार-विपक्ष आमने-सामने
वहीं राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है, लेकिन विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने किसान सम्मान निधि से नाम काटे जाने के सवाल पर कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी नहीं है और यदि कहीं नाम हटे हैं तो उन्हें फिर से जोड़ दिया जाएगा।
बजट सत्र में बढ़ती राजनीतिक गर्मी
भागीरथपुरा प्रकरण ने बजट सत्र के दौरान पेयजल व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और किसान योजनाओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष जहां इसे जनजीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार प्रक्रिया के तहत कार्रवाई और चर्चा की बात कह रही है।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सदन में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होती है और पीड़ित परिवारों को राहत तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आता है या नहीं। प्रदेश की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।













