M.P News : बड़वानी में त्योहारों को लेकर शांति समिति की बैठक, प्रशासन सतर्क, दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला का सफल आयोजन

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  बड़वानी में आगामी गुड़ी पड़वा, गणगौर उत्सव, ईद और रामनवमी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ल के निर्देशन में थाना बड़वानी में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मार्ग, समय और सुरक्षा पर हुआ मंथन

बैठक में 19 मार्च को गुड़ी पड़वा, 21 मार्च को गणगौर, ईद और 27 मार्च को निकलने वाले रामनवमी जुलूस को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान आयोजन के मार्ग, समय, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने सभी आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति लेने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अफवाहों से दूर रहने और सहयोग की अपील

प्रशासन ने आमजन से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें और आपसी समन्वय बनाए रखें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है, ताकि सभी त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सकें।

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डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला में राष्ट्र और संस्कृति पर चर्चा

इसी क्रम में 17 और 18 मार्च को बड़वानी के साखी रिसॉर्ट में स्वामी अमूर्तनंदगिरी सेवा न्यास द्वारा दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज, संस्कृति और राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ।

‘स्वबोध’ से राष्ट्र निर्माण पर जोर

पहले दिन मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त ने “भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि अपने इतिहास, संस्कृति और मूल्यों की पहचान ही सशक्त राष्ट्र की नींव है। उन्होंने मातृभाषा और भारतीय परंपराओं से जुड़ाव को आवश्यक बताया।

कल्चरल मार्क्सवाद पर चेतावनी

दूसरे दिन डॉ. मालासिंह ठाकुर ने “कल्चरल मार्क्सवाद” विषय पर बोलते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और परिवार व्यवस्था पर वैचारिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए समाज को जागरूक रहकर अपनी जड़ों को मजबूत करना होगा।

समाज में समरसता और जागरूकता का संदेश

दोनों आयोजनों के माध्यम से एक ओर जहां प्रशासन ने सुरक्षा और शांति का संदेश दिया, वहीं व्याख्यानमाला ने समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रभावना को मजबूत करने का कार्य किया। बड़वानी में यह आयोजन परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक समरसता का संतुलित उदाहरण बनकर सामने आया।

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