Balod News: बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की नगर पंचायत डौंडीलोहारा इन दिनों सुर्खियों में है। वजह कोई विकास कार्य या उपलब्धि नहीं, बल्कि अध्यक्ष की मनमानी और परिषद की उपेक्षा है। उपाध्यक्ष का साफ आरोप है कि परिषद की बैठकों में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जैसे ही बैठक में चर्चा शुरू होती है, अध्यक्ष उसे बीच में ही खत्म कर देते हैं। उपाध्यक्ष से न तो एजेंडा साझा किया जाता है, न ही परिषद की तारीख पर कोई परामर्श होता है। यानी, जो होना चाहिए सामूहिक निर्णय से, वह केवल अध्यक्ष की जेब में कैद है।
Balod News: अजीब हालात यह है कि कभी रायपुर में मीटिंग का बहाना तो कभी सीएम हाउस में बुलावे की बात कहकर अध्यक्ष स्वयं परिषद में अनुपस्थित रहते हैं। परिषद की बैठक कब होगी, यह तय करने का अधिकार मानो उनके निजी “फरमान” से चलता है। क्या नगर पंचायत का संचालन एक व्यक्ति की मनमर्जी से होना चाहिए? यह सवाल न केवल उपाध्यक्ष, बल्कि पूरे डौंडीलोहारा के नागरिक पूछ रहे हैं।वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद राजेंद्र निषाद ने भी सख्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि अध्यक्ष की निष्क्रियता और मनमानी ने नगर पंचायत को खोखला बना दिया है। जब शीर्ष पर बैठे लोग ही जिम्मेदारी से भागेंगे, तो अधिकारी और कर्मचारी क्यों नियमों का पालन करेंगे? यही वजह है कि आज नगर पंचायत में कर्मचारियों की मनमर्जी चरम पर है।
Balod News: अधिकारी अपनी सुविधा से काम करते हैं, कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है, और जनता की समस्याएं जस की तस पड़ी रहती हैं।सोचिए, जिस परिषद का काम जनता की समस्याओं को उठाना, विकास कार्यों की योजना बनाना और समाधान निकालना है, उसकी बैठक तक नियमित रूप से नहीं हो पा रही। ऐसे में विकास की उम्मीद करना क्या बेमानी नहीं है? नगर पंचायत की हालत यह हो गई है कि विकास कार्य ठप हैं, नाली-नालों से लेकर सड़क और सफाई तक सब उपेक्षित है।
Balod News: जनता का टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन उसके बदले में मिल क्या रहा है? अव्यवस्था, गंदगी और ठहराव।यह लोकतंत्र का मजाक नहीं तो और क्या है कि उपाध्यक्ष और पार्षद परिषद की बैठक के लिए भटकते रह जाएं और अध्यक्ष अपने विवेक के नाम पर मनमानी करते रहें। सवाल उठता है कि यह विवेक आखिर किसका है? जनता का, परिषद का या फिर किसी अदृश्य ताकत का? जिस नगर पंचायत को जनता की उम्मीदों के साथ चुना गया, उसे आज व्यक्तिगत अहम और राजनीतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया गया है।

Balod News: डौंडीलोहारा की जनता जानना चाहती है कि आखिर इस नगर पंचायत का भविष्य क्या है? क्या यह पंचायत केवल नाम की परिषद रह जाएगी, जहां अध्यक्ष का “फरमान” ही कानून होगा? या फिर यहां लोकतंत्र की असली भावना जागेगी, जहां जनप्रतिनिधियों की राय का सम्मान होगा और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता मिलेगी?यह स्थिति केवल डौंडीलोहारा की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी है। यदि एक अध्यक्ष इस तरह से परिषद को बंधक बना सकता है, तो यह न केवल पार्षदों का अपमान है बल्कि जनता के मत का भी अपमान है।

Balod News: उपाध्यक्ष की अनदेखी और पार्षदों को दरकिनार करना साफ दिखाता है कि नगर पंचायत को व्यक्तिगत अखाड़ा बना दिया गया है।आज जरूरत है तीखी कार्रवाई की। पार्षदों और उपाध्यक्ष को मिलकर इस मनमानी के खिलाफ खड़ा होना होगा।जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ही इस स्थिति को और बिगाड़ रही है। जनता को भी सवाल करना चाहिए—हमने जिसे अध्यक्ष चुना, वह जनता के लिए काम कर रहा है या अपनी मर्जी का साम्राज्य चला रहा है?नगर पंचायत की स्थिति देखकर यही लगता है कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो डौंडीलोहारा में विकास केवल कागज़ों और भाषणों में दिखेगा, ज़मीनी हकीकत में नहीं। और तब जनता का गुस्सा विस्फोटक रूप लेगा, जिसका सामना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होगा।











