निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ने आज एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ लिया। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना की गई। इस विशेष अनुष्ठान को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न किया।
वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान
पूरे कार्यक्रम के दौरान वैदिक आचार्यों द्वारा विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कराई गई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ सहित कई संत-धर्माचार्य मौजूद रहे।
क्या है श्रीराम यंत्र?
श्रीराम यंत्र भगवान विष्णु के सातवें अवतार प्रभु श्रीराम की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यंत्र मानसिक शांति, सुरक्षा और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। साथ ही इसे पितृ दोष, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के प्रभाव को कम करने वाला भी माना जाता है।
राष्ट्रपति का भव्य स्वागत
अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्होंने जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य द्वार से रामनगरी में प्रवेश किया और मंदिर के द्वितीय तल पर राम दरबार के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने आरती कर श्रीराम यंत्र की पूजा-अर्चना में भाग लिया।
हजारों श्रद्धालु बने साक्षी
इस भव्य आयोजन में करीब 7 हजार लोग शामिल हुए, जिनमें संत-धर्माचार्य, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिक भी शामिल थे। इस आयोजन को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर के इतिहास में नया अध्याय
श्रीराम यंत्र की स्थापना को राम मंदिर के इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण भी बन गया है।











