Sunday, August 16, 2026
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Assistant Professor : विपरीत परिस्थितियों में सफलता : बड़वानी की किसान बेटी ममता किराड़े बनी असिस्टेंट प्रोफेसर

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Assistant Professor : बड़वानी। दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए, बड़वानी जिले के निवाली क्षेत्र के छोटे से गाँव कुंजरी की बेटी ममता किराड़े ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (राजपत्रित अधिकारी) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। आदिवासी किसान परिवार से आने वाली ममता ने विपरीत परिस्थितियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद यह मुकाम हासिल किया है।

Assistant Professor : जिले में प्रथम स्थान

ममता किराड़े ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 53वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि अपनी कैटेगरी में उन्होंने पूरे जिले में पहला स्थान हासिल किया है। अब वह असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगी। उन्होंने यह सफलता रसायन शास्त्र विषय में हासिल की है, जिसमें उनके पास मास्टर डिग्री (M.Sc.) है।

Assistant Professor : संघर्ष से भरा सफर

किसान गिलदार किराड़े की बेटी ममता की शिक्षा का सफर संघर्षों से भरा रहा:

  • प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गाँव के ही सरकारी स्कूल से पूरी की।

  • उच्च शिक्षा: उन्होंने सेंधवा के सरकारी स्कूल से हाई स्कूल की पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने 2016 में एमएससी और 2018 में बीएड की डिग्री प्राप्त की।

  • शिक्षक के रूप में अनुभव: पढ़ाई पूरी करने के बाद, ममता ने 2022 से 2024 तक मेनीमाता हाई स्कूल में वर्ग दो शिक्षिका के रूप में बच्चों को पढ़ाया। वर्तमान में, वह सीएम राइज स्कूल सिलावद में वर्ग एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

Assistant Professor : पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद तैयारी जारी

ममता ने बताया कि 2020 में उनकी शादी हुई और उनकी एक बच्ची भी है। इन तमाम व्यक्तिगत और पेशेवर जिम्मेदारियों के बावजूद, उन्होंने MPPSC की तैयारी जारी रखी। उन्होंने 2022 में 80 पदों के लिए आयोजित इस कठिन परीक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया, जिसका परिणाम हाल ही में घोषित हुआ है।

Assistant Professor : 

“विपरीत परिस्थितियाँ थीं, शादी के बाद परिवार और बच्ची की जिम्मेदारी भी थी, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मेरे माता-पिता और पति ने मुझे हमेशा प्रेरित किया और पूरा सहयोग दिया। उनकी प्रेरणा से ही मैं अपनी नौकरी और परिवार संभालते हुए यह मुकाम हासिल कर पाई। यह सफलता मेरे लिए और मेरे पूरे समुदाय के लिए गर्व का क्षण है।”

— ममता किराड़े, असिस्टेंट प्रोफेसर (चयनित)

ममता ने अपनी इस शानदार उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और पति के निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग को दिया है। उनकी यह सफलता ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उच्च शिक्षा और प्रशासनिक पदों को हासिल करने का सपना देखती हैं।

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