Asha Workers Protest : इंदौर । प्रदेश की आशा और आशा पर्यवेक्षकों ने बीते तीन से चार महीनों से वेतन (मानदेय) का भुगतान न होने से नाराज होकर आज कलेक्टर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वेतन के अभाव में उनके राखी, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार भी फीके पड़ गए, जिससे उनके परिवारों का गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है।
Asha Workers Protest : वादाखिलाफी से नाराज, 17 तारीख को 24 घंटे का विरोध
आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार उनकी समस्याओं के प्रति उदासीनता दिखा रहा है और जवाबदेही से बच रहा है।
विभाग के आदेश की अवहेलना : कार्यकर्ताओं ने बताया कि विभाग ने बार-बार आदेश जारी किए हैं कि हर महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान कर दिया जाए, लेकिन इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
आंदोलन की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया और लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो 17 तारीख को प्रदेशभर में 24 घंटे का व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
हम भी प्रदेश की बेटियां हैं, भेदभाव क्यों?’
संयुक्त मोर्चा की प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगें दोहराते हुए कहा कि आशा एवं उषा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और उनके वेतनमान में तत्काल सुधार किया जाए।
मुख्यमंत्री के वादों की याद दिलाई : कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने उनके मानदेय में चार हजार रुपए की वृद्धि और हर वर्ष एक हजार रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन ये घोषणाएं आज तक लागू नहीं हुईं।
‘लाड़ली बहना’ पर सवाल : प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब सरकार ‘लाड़ली बहना योजना’ के माध्यम से महिलाओं को सशक्त कर रही है, तो प्रदेश की लगभग 84 हजार आशा कार्यकर्ता जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, उनके साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?













