रायपुर: छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल की 26 दिनों की फरारी आखिरकार मंगलवार को खत्म हो गई। रायपुर के देवेंद्र नगर थाने में सरेंडर करने पहुंचे बघेल को पुलिस ने थाने से कुछ ही दूरी पर घेरकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि यह कानूनी गिरफ्तारी है, जबकि बघेल के समर्थकों ने इसे स्वैच्छिक सरेंडर बताया है।
“गिरफ्तारी से पहले का हाईवोल्टेज सीन”
देवेंद्र नगर थाना बाहरी क्षेत्र मंगलवार को किसी फिल्मी सीक्वेंस जैसा नजर आया। भारी पुलिस बल तैनात था, समर्थकों की भीड़ नारेबाजी कर रही थी और अचानक पुलिस ने आगे बढ़कर बघेल को काबू में कर लिया। गिरफ्तारी के वक्त उनके साथ एक वकील भी मौजूद थे।
“फरार से गिरफ्तारी तक—26 दिन की कहानी”
अमित बघेल पिछले 26 दिनों से फरार थे। वजह—झूलेलाल और अग्रसेन महाराज के खिलाफ उनके विवादित बयान, जिनका विरोध पूरे देश में हुआ। उनके खिलाफ 12 राज्यों में केस दर्ज बताए जा रहे हैं।26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी—“अपनी जुबान पर लगाम रखें और जहां-जहां मामला दर्ज है, वहां की प्रक्रिया का सामना करें।”
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“गिरफ्तारी, कोर्ट और अंतिम संस्कार”
गिरफ्तारी के बाद बघेल को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।चूंकि शुक्रवार को उनकी मां का निधन हुआ था, इसलिए पुलिस उन्हें कस्टडी में अंतिम संस्कार के लिए उनके गांव पथरी ले जाएगी।
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“सड़कों पर समर्थकों का गुस्सा—दो घंटे जाम”
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही समर्थकों ने आमापारा जी रोड को जाम कर दिया।
लगभग दो घंटे तक दोनों तरफ का ट्रैफिक ठप रहा। हालांकि, पुलिस और समर्थकों की आपसी समझ से एंबुलेंस को रास्ता दिया गया।छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला महामंत्री मनोज साहू ने पुलिस पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया और कहा—“जब वे खुद सरेंडर करने आए थे, तो इतना ड्रामा क्यों?”
“शुरुआत कैसे हुई—मूर्ति विवाद और विवादित टिप्पणी”
रायपुर के VIP रोड पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति क्षतिग्रस्त मिलने के बाद बघेल और उनके समर्थक विरोध में उतरे थे।भीड़ के बीच उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियाँ कर दीं, जिनसे सिंधी और अग्रवाल समाज नाराज़ हो गया।देशभर में विरोध हुआ और विभिन्न थानों में FIR दर्ज की गई।











