Sunday, August 23, 2026
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Alok Shukla : सरेंडर करने तीसरी बार कोर्ट पहुंचे पूर्व IAS आलोक शुक्ला, नान घोटाले के है आरोपी, ED ले सकती है रिमांड पर, सुनवाई जारी

Alok Shukla
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Alok Shukla : रायपुर: रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला एक बार फिर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे हैं। यह तीसरी बार है जब वे सरेंडर के लिए कोर्ट पहुंचे हैं। इस दौरान कोर्ट परिसर में ED के अधिकारी और CRPF के जवान मौजूद हैं। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) आलोक शुक्ला को कस्टोडियल रिमांड पर ले सकती है। फिलहाल कोर्ट में सरेंडर की प्रक्रिया जारी है।

Alok Shukla : तीन दिन पहले, 19 सितंबर को भी आलोक शुक्ला ने कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय ED के वकील केस डायरी लेकर नहीं पहुंचे थे, जिससे अदालत ने समय देने की अनुमति दी थी। इससे पहले 18 सितंबर को भी वे कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपलोड न होने के कारण कोर्ट ने सरेंडर स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

Alok Shukla : सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है?

Alok Shukla : नान घोटाले में आलोक शुक्ला को पहले हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन ED ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। ED ने बताया कि आरोपियों ने 2015 में दर्ज मामले और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी और जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

Alok Shukla : सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जिसमें जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे — ने हाईकोर्ट की ओर से दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले दो हफ्ते आलोक शुक्ला ED की कस्टडी में रहेंगे, इसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में, और फिर ही उन्हें जमानत मिल सकेगी।

Alok Shukla : ED को 3 महीने में जांच पूरी करने के निर्देश

Alok Shukla : सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ED तीन महीने में और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) दो महीने में जांच पूरी करें। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि लंबित मामलों का समय पर निपटारा होना चाहिए।

Alok Shukla : नान घोटाला क्या है?

Alok Shukla : नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला फरवरी 2015 में सामने आया था, जब ACB और EOW ने एक साथ निगम के 25 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान करीब 3.64 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए थे। साथ ही, चावल और नमक के जो नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, उनमें घटिया गुणवत्ता की पुष्टि हुई थी, जो मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त बताए गए। घोटाले में कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए थे।

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