रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर कोर्ट ने आज फर्जी पासपोर्ट के मामले में अब्दुल्ला आज़म को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले अब्दुल्ला आज़म को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड मामलों में भी 7-7 साल की सजा हो चुकी है। यह अब्दुल्ला आज़म की तीसरी सजा है।
रामपुर जेल में बंद अब्दुल्ला आज़म
अब्दुल्ला आज़म फिलहाल अपने पिता आज़म खान के साथ रामपुर जिला कारागार में बंद हैं। उनके खिलाफ लंबी जांच के बाद अदालत ने फैसला सुनाया। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला ने कूट-रचित और असत्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट प्राप्त किया और उसका उपयोग किया।
फर्जी दस्तावेजों की जांच में खुली पोल
जांच में पता चला कि अब्दुल्ला आज़म के पास दो अलग-अलग पासपोर्ट थे। पहले में जन्मतिथि 30 सितंबर 1990, जबकि दूसरे में 1 जनवरी 1993 अंकित थी। कोर्ट ने इसे फर्जी साबित कर दोषी ठहराया।
राजनीतिक हलकों में उठा हलचल का मुद्दा
अब्दुल्ला आज़म को सुनाई गई सजा के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में था और अब अदालत के फैसले से नई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
कोर्ट का फैसला और भविष्य की राह
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब्दुल्ला आज़म को फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के लिए सजा दी गई है और कानून का कठोर पालन होगा। अब उनका जेल में समय पूरा होने के बाद भी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।











