Transgender Rights Bill 2026 : नई दिल्ली | 28 मार्च 2026 भारत सरकार द्वारा हाल ही में पारित ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति परिषद (NCTP) की दो प्रमुख सदस्यों, कल्कि सुब्रमण्यम और ऋतुपर्णा नियोग ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सलाहकारों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इतने महत्वपूर्ण कानून को पेश करने से पहले खुद परिषद के सदस्यों से कोई परामर्श नहीं लिया और उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब परिषद के सदस्यों को विधेयक पेश होने के बाद चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया गया। सदस्यों का दावा है कि उन्हें बहुत कम समय का नोटिस दिया गया, जिससे कई लोग पहुँच भी नहीं सके। जो चार प्रतिनिधि दिल्ली पहुँचे, उन्हें दो घंटे इंतजार कराने के बाद बताया गया कि केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार अस्वस्थ हैं और उनसे नहीं मिल पाएंगे। इसके बाद एक वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार के साथ हुई बैठक भी बेनतीजा रही, जहाँ सलाहकारों के सुझावों को कथित तौर पर “खारिज” कर दिया गया।
विशेषज्ञों की मुख्य आपत्ति ‘स्व-पहचान’ (Self-identification) के अधिकार को कमजोर करने और लिंग निर्धारण के लिए ‘मेडिकल बोर्ड’ की अनिवार्यता पर है। ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं का मानना है कि मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया अपमानजनक है और यह व्यक्ति की गरिमा के खिलाफ है। कल्कि सुब्रमण्यम ने बताया कि उन्होंने मंत्री के निजी सहायक के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन सरकार ने संशोधनों को जस का तस लोकसभा और राज्यसभा से पारित करा लिया।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय को कानूनी अधिकार और सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए लाया गया है। सदन में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि कानून का उद्देश्य उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है जो अपनी जैविक स्थिति के कारण सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं। हालांकि, सलाहकारों के सामूहिक इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल की आपत्तियों ने इस कानून की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









