Monday, September 28, 2026
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छत्तीसगढ़ से भगवान राम का गहरा नाता! यहां खाए थे शबरी के ‘झूठे’ बेर, जानिए शिवरीनारायण का महत्व

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल और कर्मभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता कौशल्या की जन्मभूमि होने के कारण यहां श्रीराम को भांजे के रूप में पूजा जाता है। वनवास के 14 वर्षों में श्रीराम ने इस क्षेत्र में काफी समय बिताया था।

शिवरीनारायण: गुप्त प्रयाग की पहचान

जांजगीर-चांपा जिले का शिवरीनारायण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसे ‘गुप्त प्रयाग’ कहा जाता है, क्योंकि यहां महानदी, शिवनाथ और जोक नदियों का त्रिवेणी संगम होता है। यह स्थल आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

शबरी के बेर की पावन कथा

मान्यता है कि शिवरीनारायण में ही माता शबरी ने भगवान राम को प्रेमपूर्वक बेर खिलाए थे। यह प्रसंग भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि शबरी ने अपने हाथों से बेर चखकर मीठे बेर ही भगवान को अर्पित किए थे।

नर-नारायण मंदिर का महत्व

यहां स्थित प्राचीन नर-नारायण मंदिर को छत्तीसगढ़ का ‘जगन्नाथपुरी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान कभी शिवरीनारायण ही था। माघी पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ के यहां आने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।

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अक्षय वट वृक्ष की विशेषता

शिवरीनारायण में एक अद्भुत वट वृक्ष भी है, जिसके पत्तों की आकृति दोने (पत्तल) जैसी बताई जाती है। कहा जाता है कि माता शबरी ने इन्हीं पत्तों में बेर रखकर भगवान राम और लक्ष्मण को खिलाए थे। इस वृक्ष को ‘अक्षय वट’ कहा जाता है और इसकी विशेष मान्यता है।

आस्था और परंपरा का केंद्र

शिवरीनारायण न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और इस पवित्र स्थल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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