निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में वन वृक्षों से सलाई गोंद और धवड़ा गोंद निकालने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। शहर के जागरूक नागरिकों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने वन विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रतिबंध के बावजूद गलत तरीके से लाइसेंस जारी कर पेड़ों से गोंद निकाला जा रहा है।
जांच रिपोर्ट में सामने आया भारी नुकसान
याचिकाकर्ता के वकील ने संभागीय वन अधिकारी की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि करीब 89 प्रतिशत सलाई और 73 प्रतिशत धवड़ा वृक्ष क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि गोंद निकालने के लिए कृत्रिम रसायनों का उपयोग किया जा रहा था, जिससे पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और वन पारिस्थितिकी पर खतरा बढ़ रहा है।
आदेश उल्लंघन पर अवमानना की चेतावनी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि प्रतिबंध के बावजूद गतिविधियां जारी रहीं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कदम उठाए गए।
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वन विभाग ने निरस्त किए सभी लाइसेंस
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग बुरहानपुर ने तत्काल प्रभाव से सभी जारी लाइसेंस निरस्त कर दिए और क्षेत्र में गोंद निकासी पर पुनः पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया। संबंधित आदेश की प्रतियां सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कर दी गई हैं, ताकि किसी प्रकार का उल्लंघन न हो।
पर्यावरण संरक्षण बना प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित गोंद निकासी से वन संसाधनों को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण और वन संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।













