भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति गर्म हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की विस्तृत रणनीति तय की गई। कांग्रेस ने साफ कहा कि यह सत्र “आंकड़ों का खेल” नहीं बनने दिया जाएगा, बल्कि जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांगे जाएंगे।
जनता के मुद्दों पर फोकस
बैठक में निर्णय लिया गया कि कांग्रेस किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक समस्याओं पर सरकार स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
जल प्रदूषण मौत मामला बनेगा बड़ा मुद्दा
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में कथित जल प्रदूषण से हुई मौतों को कांग्रेस ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया है। इस मुद्दे पर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चर्चा से बच रही है और जिम्मेदारी तय करने से कतरा रही है।
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कर्ज पर श्वेत पत्र और मंत्रियों के इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश का बजट आकार बढ़ रहा है, लेकिन राज्य पर कर्ज का बोझ उससे भी तेज गति से बढ़ रहा है। कांग्रेस ने राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
इसके साथ ही प्रशासनिक विफलताओं को लेकर कैलाश विजयवर्गीय, राजेंद्र शुक्ल और विजय शाह से इस्तीफे की मांग उठाने का भी निर्णय लिया गया है। पार्टी का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना सुशासन का दावा अर्थहीन है।
सदन से सड़क तक संघर्ष की तैयारी
कांग्रेस इस बार केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहना चाहती। बैठक में तय हुआ कि पार्टी सदन से लेकर सड़क तक चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति लागू करेगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है, जिससे सदन का माहौल और अधिक गर्म रहने की संभावना है।













