SDM Karun Dahariya Controversy : कुसमी/बलरामपुर (16 फरवरी 2026): बलरामपुर जिले के कुसमी में एक आदिवासी बुजुर्ग की मौत के बाद हिरासत में लिए गए एसडीएम करुण डहरिया का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के इस अधिकारी की छवि एक जनसेवक की नहीं, बल्कि एक ‘विवादित तानाशाह’ की रही है। वर्तमान में हत्या के आरोपों में घिरे डहरिया का अतीत भ्रष्टाचार और बदसलूकी की कई कहानियों से भरा पड़ा है।
1. गरियाबंद रिश्वत कांड: रंगे हाथों हुए थे गिरफ्तार
करुण डहरिया के करियर का सबसे बड़ा दाग वर्ष 2022 में लगा। जब वे गरियाबंद में जनपद सीईओ के पद पर थे, तब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके दफ्तर में ही दबोचा था। यह रिश्वत एक बोरवेल खनन का बिल पास करने के बदले मांगी गई थी। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा और निलंबित भी किया गया था, लेकिन बहाली के बाद वे फिर से रसूखदार पदों पर पहुँच गए।
2. जांजगीर-चांपा: छात्रों को थप्पड़ मारने की धमकी
पामगढ़ (जांजगीर-चांपा) में पदस्थापना के दौरान उन्होंने अपनी मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी थीं। अपनी जायज मांगों को लेकर ज्ञापन देने आए स्कूली छात्रों को सुनने के बजाय उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारने की धमकी दी थी। इस घटना के बाद छात्रों ने उनके खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया था, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दी थी।
3. अवैध वसूली और लकड़ी तस्करी के आरोप
कुसमी में पदस्थापना के दौरान उन पर 6 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगा। बताया जाता है कि इमारती लकड़ी से लदे एक ट्रक को छोड़ने के बदले उन्होंने यह डील की थी। इस मामले का एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हुआ था, जिसकी शिकायत फिलहाल आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में लंबित है।
4. शक्तियों का दुरुपयोग और तानाशाही
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करुण डहरिया मजिस्ट्रेट की शक्तियों का उपयोग न्याय के लिए नहीं, बल्कि डराने के लिए करते थे। कुसमी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के नाम पर युवक का कॉलर पकड़ना हो या विरोध करने वालों को झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देना, उनके ऐसे कई कारनामे चर्चा में रहे हैं।
वर्तमान स्थिति: राजपुर थाने में हिरासत
आदिवासी बुजुर्ग की मौत के बाद उपजे जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने एसडीएम करुण डहरिया, नायब तहसीलदार पारस शर्मा और तीन अन्य सहयोगियों को हिरासत में ले लिया है। सुरक्षा कारणों से इन्हें कुसमी से हटाकर राजपुर थाने में रखा गया है। बलरामपुर कलेक्टर और एसपी ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है, लेकिन आदिवासी समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।













